16.7.14

है अभी दिन शेष अर्जुन

है अभी दिन शेष अर्जुन,
लक्ष्य कर संधान अर्जुन 

सूर्य भी डूबा नहीं है,
शत्रु भी तेरा यहीं है,
शौर्य के दीपक जला देविजय की हुंकार भी सुन 
है अभी दिन शेष अर्जुन ।।१।।

सही की चाहे गलत की,
पार्थ तुमने प्रतिज्ञा की,
अगर निश्चय कर लिया तोलक्ष्य का एक मार्ग भी चुन 
है अभी दिन शेष अर्जुन ।।२।।

व्यर्थ का नैराश्य तजकर,
असीमित आवेश भरकर,
करो तर्पित सिन्धु भ्रम केव्यथाआें के तार मत बुन 
है अभी दिन शेष अर्जुन ।।३।।

सूर्य मेघों में छिपा था,
काल तेरे हित रुका था,
जीवनी जब तक रहेगीरहेगा दिन शेष अर्जुन 
है अभी दिन शेष अर्जुन ।।४।।

16 comments:

  1. जीवन जीने की संदेश देती कविता. सुंदर रचना.

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  2. सुंदर प्रस्तुति...
    दिनांक 17/07/2014 की नयी पुरानी हलचल पर आप की रचना भी लिंक की गयी है...
    हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...
    हलचल में शामिल की गयी सभी रचनाओं पर अपनी प्रतिकृयाएं दें...
    सादर...
    कुलदीप ठाकुर

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  3. है अभी दिन शेष अर्जुन,
    लक्ष्य कर संधान अर्जुन ।
    ..लक्ष्य पर अडिग बने रहने की प्रेरक प्रस्तुति

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  4. काश हम व्यर्थ का नैराश्य ताज पाते
    तो निश्चित ही इतिहास में अर्जुन की ही तरह देखे जाते
    पर लगा लेते है बड़ी बड़ी आशाएं
    इसीलिए जीवन के दिन है रोते रोते कट जाते
    ।।।।
    प्रेरक प्रस्तुति

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  5. वाह... बहुत सुन्दर

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  6. आशा ही है जीवन का आधार.
    बहुत सुंदर रचना.

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  7. ओजपूर्ण स्तुत्य रचना।

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  8. बेहद ओजस्वी रचना गीता सार की तरह बधाई पाण्डेय जी

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  9. वाह! सुंदर रचना , समाज में फैली कुरीतियों को चुनौती एवं खुद को साहस देती बेहद ओजस्वी बहुत सुंदर रचना. अच्छे चरित्र को एक नया आयाम देती कविता.

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  10. समय तो आखिरी श्वास तक हमारी राह देखता है...सुंदर रचना

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  11. दृढ़ विश्वास और परिश्रम ही फलीभूत होते हैं।

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  12. वाह....सुंदर रचना

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  13. अनुपम भावों का संगम ..... उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति

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  14. ओजपूर्ण रचना........

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  15. Upyukt sandesho ke saath likhi rachna sarthak.....badhai

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  16. जीवन का पथ दिखलाती कविता।

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