5.7.14

आँखों के आँसू


विधि के हाथ रचे जीवन काभार उठाये हाथों में,
आहों का उच्छ्वास रोककरफूलीउखड़ी साँसों में 
कष्ट हृदय-बल तोड़ रहारह शान्त वेदना सहते हैं,
आँखों से पर बह आँसू दोकई और कहानी कहते हैं ।।१।।

है बाढ़मड़ैया डूब रहीपुनिया शंकितचुपचाप खड़ी,
बहता जाता जल वेगवानकंपित मनस्थिर हुये प्राण 
भर आयीं पर आँखें रो रोयाद रहाबस हुये वर्ष दो,
था निगल गया एक चक्रवातमेरे नन्हे से कान्हू को ।।२।।

गंगू के खेतों में सूखाआस वाष्पितजीवन रूखा,
क्षुब्ध हृदयविधि का प्रहारदेखे नभकोसे बार बार 
तब जल आँखों में आयेगाऔर प्रश्न यही कर जायेगा,
कैसे साहू का कर्ज पटाबेटी का ब्याह रचायेगा ।।३।।

पुत्र शहीद हुआ सीमा परदुख में डूबे थे गंगाधर,
पुत्र गया था माता के हितगर्वयुक्त था मन जो आहत 
पर बेटे की सुध धुँधलायेभीगी आँखेंकौन बताये,
कैसे बीते पुत्रवधू काखड़ा शेष जीवन मुँह बाये ।।४।।

राधे तपताजलता ज्वर मेंअकुलाता रह रह अन्तर में,
तन की पीड़ा सब गयी भूलउठता मन में एक प्रश्न-शूल 
दृगजल बहताकह जायेगायदि नहीं दिहाड़ी पायेगा,
कैसे कल चावल-भात बिनाबच्चों की भूख मिटायेगा ।।५।।

25 comments:

  1. पुत्र शहीद हुआ सीमा पर, दुख में डूबे थे गंगाधर,
    पुत्र गया था माता के हित, गर्वयुक्त था मन जो आहत ।
    @ यही गर्व मातृभूमी पर बलि होने वालों को प्रेरित करता है !!
    पर बेटे की सुध धुँधलाये, भीगी आँखें, कौन बताये,
    कैसे बीते पुत्रवधू का, खड़ा शेष जीवन मुँह बाये ।।४।।
    @ यही विडम्बना है !!

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  2. कष्ट ह्रदय बल तोड़ रहा शांत वेदना सहता है
    जीवन का कडुवा सत्य

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  3. व्यथा एक रूप अनेक

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  4. रोंगटे खड़े हुए

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  5. http://www.parikalpnaa.com/2014/07/blog-post_5.html

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  6. हृदयस्पर्शी.....

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  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (06-07-2014) को "मैं भी जागा, तुम भी जागो" {चर्चामंच - 1666} पर भी होगी।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  8. ब्लॉग बुलेटिन आज की बुलेटिन, ईश्वर करता क्या है - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  9. मार्मिक अभिव्यक्ति ।

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  10. आँखों से पर बह आँसू दो, कई कहानी कहते हैं ।।१।।
    जीवन ...व्यथा .... विविध रूप लिए ...हृदयस्पर्शी भाव ....!!

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  11. मार्मिक रचना...

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  12. जीवन की विकट विवशता का उत्‍कृष्‍ट कवितामयी निरूपण।

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  13. .अद्धभुत .......मार्मिक रचना...

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  14. कल 08/जुलाई /2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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  15. मार्मिक ... कविता में जीवंत भाव ढल दिए ...

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  16. "चाट रहे हैं जूठी पत्तल कभी सडक पर खडे हुए
    और झपट लेने को उनसे कुत्ते भी हैं अडे हुए ।"
    निराला

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  17. विधि के आगे सब बेबस हैं।

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  18. वाज रे जीवन। विधान के आगे सब कुछ बेकार। दुःख और भावो को बेहद मर्स्पर्शी शब्दों के साथ रखा आपने। बढ़िया

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  19. सोचना होगा ये आँसू कैसे दूर हो !

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  20. हृदयस्पर्शी......

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  21. बेहतरीन.....मार्मिक रचना

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  22. दिल को छू गयी..बहुत मार्मिक

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  23. सभी की अपनी पीड़ा, अपने घाव हैं.

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