15.10.11

मेरी बिटिया पढ़ा करो

माना तुमको गुड्डे गुड़िया पुस्तक से प्रिय लगते हैं,
माना अनुशासन के अक्षर अनमन दूर छिटकते हैं,
माना आवश्यक और प्यारी लगे सहेली की बातें,
माना मन में कुलबुल करती बकबक शब्दों की पातें,
पर पढ़ने के आग्रह सम्मुख, प्रश्न न कोई खड़ा करो,
मेरी बिटिया पढ़ा करो।१। 

विद्यालय जाना बचपन का एक दुखद निष्कर्ष सही,
रट लेने की पाठन शैली लिये कोई आकर्ष नहीं,
उच्छृंखल मंगल में कैसे भाये सध सधकर चलना,
बाहर झमझम बारिश, सूखे शब्दों से जीवन छलना,
पर भविष्य को रखकर मन में, वर्तमान से लड़ा करो,
मेरी बिटिया पढ़ा करो।२।

बालमना हो, बहुत खिलौने तुमको भी तो भाते हैं,
मन में दृढ़ हो जम जाते हैं, सर्वोपरि हो जाते हैं,
पढ़ने का आग्रह मेरा यदि, तो तुम राग वही छेड़ो,
केवल अपनी बातें मनवाने को दोष तुरत मढ़ दो, 
आज नहीं तो कल आयेंगे, हठ पर न तुम अड़ा करो,
मेरी बिटिया पढ़ा करो।३।

नहीं अगर कुछ हृदय उतरता, झरझर आँसू बहते क्यों,
बस प्रयास कर लो जीभर के, ‘न होगा यह’ कहते क्यों,
देखो सब धीरे उतरेगा, प्रकृति नियम से वृक्ष बढ़े,
बीजरूप से महाकाय बन, नभ छूते हैं खड़े खड़े,
बस कॉपी में सुन्दर लेखन, हीरे मोती जड़ा करो,
मेरी बिटिया पढ़ा करो।४।

शब्द शब्द से वाक्य बनेंगे, वाक्य तथ्य पहचानेंगे,
तथ्य संग यदि, निश्चय तब हम जग को अच्छा जानेंगे,
ज्ञान बढ़े, विज्ञान बढ़े, तब आधारों पर निर्णय हो,
दृष्टि वृहद, संचार सुहृद, तब क्षुब्ध विषादों का क्षय हो,
आनन्दों का आश्रय होगा, शब्दों से नित जुड़ा करो,
मेरी बिटिया पढ़ा करो।५।

है अधिकार पूर्ण हम सब पर, घर में जो है तेरा है,
एक समस्या, आठ हाथ हैं, संरक्षा का घेरा है,
सबका बढ़ना सब पर निर्भर, यह विश्वास अडिग रखना,
संसाधन कम पड़ते रहते, मन का धैर्य नहीं तजना,
छोटे छोटे अधिकारों पर, भैया से मत लड़ा करो,
मेरी बिटिया पढ़ा करो।६।

यही एक गुण भेंट करूँगा, और तुम्हें क्या दे सकता,
जितना संभव होगा, घर की जीवन नैया खे सकता,
एक सुखद बस दृश्य, खड़ी तुम दृढ़ हो अपने पैरों पर,
सुख दुख तो आयें जायेंगे, रहो संतुलित लहरों पर, 
निर्बन्धा हो, खुला विश्व-नभ, पंख लगा लो, उड़ा करो,
मेरी बिटिया पढ़ा करो।७।

क्या बनना है, निर्भर तुम पर, स्वप्न तुम्हे चुन लाने हैं,
मन की अभिलाषा पर तुमको अपने कर्म चढ़ाने हैं,
साथ रहूँगा, साथ चलूँगा, पर निर्भरता मान्य नहीं,
राह कठिनतम आये, आये, तुम भी हो सामान्य नहीं,
तुम सब करने में सक्षम हो, स्वप्न हृदय का बड़ा करो,
मेरी बिटिया पढ़ा करो।८।

है पितृत्व का बोध हृदय में, ध्यान तुम्हारा रखना है,
मिला दैव उपहार, पालना सृष्टि श्रेष्ठ संरचना है,
रीति यही मैं रीत रहूँ, लेकिन तू जिस घर भी जाये,
प्रेम हृदय में संचित जितना, उस घर जाकर बरसाये,
मेरे मन में, यह दृढ़निश्चय, नित-नित थोड़ा बड़ा करो,
मेरी बिटिया पढ़ा करो।९।

110 comments:

  1. है पितृत्व का बोध हृदय में, ध्यान तुम्हारा रखना है,
    मिला दैव उपहार, पालना सृष्टि श्रेष्ठ संरचना है,

    बहुत सुंदर कविता और बहुत प्यारी बिटिया ........पिता के ह्रदय से निकले उद्गार लिए हर पंक्ति हृदयस्पर्शी है......

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  2. 'है अधिकार पूर्ण हम सब पर, घर में जो है तेरा है,
    एक समस्या, आठ हाथ हैं, संरक्षा का घेरा है,


    पिता द्वारा व्यक्त अंतर के भाव.....प्रेरक उद्बोधन गीत !

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  3. बहुत सुल्दर शिक्षाप्रद रचना!

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  4. बहुत सुंदर सन्देश देती हुई रचना पिता की चिंता को भी उजागर करती है यह रचना, बहुत अच्छी

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  5. देवला बिटिया को स्नेहाशीष और सुखद भविष्य के लिए शुभकामनाएं ..
    वो सब कुछ करेगी और पापा का निश्चय दॄढ़ होगा..

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  6. पितृत्व की चिंताएं बखूबी बयां की हैं आपने। बहुत ही भावपूर्ण अभिव्यक्ति।

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  7. कल कल बहती नदी के प्रवाह समान सुंदर भाव प्रवण काव्यात्मक प्रस्तुति और एक पिता का बेटी के नाम स्नेह भरा संदेश। उत्तम प्रस्तुति।


    गुजर गया एक साल

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  8. वाह, पुत्री को पिता की ओर से यह ब्लॉग पोस्ट निवेदन एक यादगार कृति है हर पिता लिए जो अपनी पुत्री के लिए सर्वतोभद्र कामना करता है ..बहुत प्रभावशाली रचना !

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  9. आँखें भर आयीं...आपने अपनी बेटी के लिए कितना सुन्दर लिखा है.

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  10. बेहद भावुक और प्यारी कविता, हम भी अपने बेटे को सुनायेंगे यह कविता ।

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  11. प्यारी सी बिटिया के लिए आपकी प्यारी सी कविता बहुत सुंदर लगी |प्यारी बिटिया मेहनत से पढ़ाई करो और पाण्डेय जी [अपने पिता ]से भी बहुत आगे बढ़ो |शुभकामनाएं |

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  12. प्यारी सी बिटिया के लिए आपकी प्यारी सी कविता बहुत सुंदर लगी |प्यारी बिटिया मेहनत से पढ़ाई करो और पाण्डेय जी [अपने पिता ]से भी बहुत आगे बढ़ो |शुभकामनाएं |

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  13. वाह ! शानदार रचना|

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  14. मिला दैव उपहार, पालना सृष्टि श्रेष्ठ संरचना है,
    यकीनन बेटिया सृष्टि की श्रेष्ठ संरचना हैं
    बहुत सुन्दर और भावुक कर देने वाली रचना ..

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  15. बिटिया, पढ़ा करो.
    सुबह कोचिंग जाओ,
    शाम को डांस क्लासेज़
    दोपहर कराटे सीखो
    और समय बचे तो कुकरी सीखो.
    बिटिया, पढ़ा करो.
    बचपन और बचपने में क्या रखा है
    खेलकूद और मस्ती
    टाइम वेस्ट के सिवा कुछ नहीं,
    बिटिया पढ़ा करो!!!!!
    पढ़ा करो!!! पढ़ा करो!!!!!

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  16. बहुत ही अच्छी भावनाएँ हैं कविता मे।

    सादर

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  17. वाह वाह एक पिता का वात्सल्य और बेटी को आगे बढ़ाने की भावना का अद्भुत मिश्रण तैयार किया है आपने साधूवाद आपकी लेखनी को

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  18. बेटी को उत्तम सीख देती सुन्दर रचना ...

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  19. बहुत ही बढ़िया सीख देती है ये कविता, सच में बच्चों को पढ़ाना बहुत मुश्किल है.पर आपका पितृत्व धन्य है,

    विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

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  20. है पितृत्व का बोध हृदय में, ध्यान तुम्हारा रखना है,
    मिला दैव उपहार, पालना सृष्टि श्रेष्ठ संरचना है,

    भावमय करते शब्‍दों का संगम... इस रचना में ।

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  21. बहुत प्यारा गीत है.

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  22. यकीनन बेटिया सृष्टि की श्रेष्ठ संरचना हैं
    ekdam theek bole......sunder kavita likhe hain.

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  23. अभी बिटिया पूजन को बुला कर खास तौर पर सुनाई ये कविता...

    जय हिंद...

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  24. प्रेणदायक रचना

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  25. पापा की चिंता ,पापा का प्यार
    दोनों का साथ और बार-बार ....
    आशीर्वाद और प्यार !

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  26. बहुत सुंदर रचना। मैं अपनी पोती को पढ्वाऊंगा॥

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  27. दिल को छूने वाली कविता !

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  28. बहुत बढ़िया. और क्या कहें !

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  29. are pyaari bitiya padh lo ...apne sapnon se papa ke sapne poore ker do

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  30. यह कविता तो बिटिया जीवन भर पढ़ते रहना चाहेगी।
    ...बहुत सुंदर।

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  31. वाह वाह वाह ...शब्द नहीं हैं मेरे पास.सुन्दरतम...
    अपनी बेटी को भी पढ़ाऊंगी.

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  32. बस चिट्ठे में सुन्दर लेखन, हीरे मोती जड़ा करो।
    लगे रहो प्रवीण भैया, तुम बस हर रोज़ लिखा करो।

    Absolutely charming picture with the most pinchable cheeks I have seen!
    Regards
    GV

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  33. प्यारी सी बेटी के लिए सुन्दर लिखा है....!

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  34. जरूरी कार्यो के कारण करीब 15 दिनों से ब्लॉगजगत से दूर था
    आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ,

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  35. पिता और पुत्री दोनो अति कोमलमना व संवाद सुखकर हैं। कामना व विश्वास है कि आपकी बिटिया भी आप की ही तरह हर रूप से पूर्ण व्यक्तित्व व सर्सवफल होगी और आपकी कविता में अभिव्यक्त आपकी भावनाओं को अवस्य साकार करेगी। बहुत सुंदर व हृदय स्पर्शी संदेशगीत। बहुत-बहुत शुभकामनायें।

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  36. बाप की कविता बिटिया के नाम एक सफरनामा एक आश्वाशन साथ साथ चलने का आगे बढ़ने का एक आत्मविश्वास रोपती कविता .बेहद सार्थक आश्वस्त करती रचना .

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  37. बहुत सुंदर...प्यारी कविता

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  38. वाह बहुत सुंदर संदेश देती हुई बढ़िया प्रस्तुति....शुभकामनयें

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  39. वाह ---

    बहुत बढ़िया प्रस्तुति ||
    शुभ-कामनाएं ||

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  40. पिता का प्यार शब्दों में बह निकला,आँखें नम हुईं पापा की याद आ गई..
    हर बेटी के लिये एक अमूल्य तोहफा है आपकी ये रचना। रचना सी ही प्यारी है आपकी बेटी और सौभाग्यशाली भी जिसके पिता आप हैं...

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  41. इतनी खुबसूरत कविता भी हो सकती है..? हाँ ! बिटिया की तरह ही.

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  42. बहुत खूबसूरत कविता है बिटिया के लिए...

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  43. पितृ - सम्मित - उपदेश ...
    अद्भुत ग्राह्य विलक्षण और सदयः प्रभावी ...सुखद कविता

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  44. .
    .
    .
    सुन्दर, अति सुन्दर...

    अपनी बिटिया को भी पढ़ाई यह कविता... अब कम से कम एक सप्ताह तक होमवर्क करवाने में आराम रहेगा पत्निश्री को... :)



    ...

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  45. नहीं अगर कुछ हृदय उतरता, झरझर आँसू बहते क्यों, बस प्रयास कर लो जीभर के, ‘न होगा यह’ कहते क्यों, देखो सब धीरे उतरेगा, प्रकृति नियम से वृक्ष बढ़े, बीजरूप से महाकाय

    प्रेरणादायक पंक्तियाँ...प्यारी सी बिटिया के लिए पिता के दिल से निकला भावभीना उद्गार...

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  46. This is so adorable !!
    undoubtedly u r a lovely dad :)

    Smiles !!

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  47. प्रवीण पाण्डेय जी बहुत सुन्दर रचना ...प्यारा सन्देश काश लोग इस को आजमायें गले लगाएं ..बधाई हो ...
    भ्रमर ५
    यही एक गुण भेंट करूँगा, और तुम्हें क्या दे सकता,
    जितना संभव होगा, घर की जीवन नैया खे सकता,
    एक सुखद बस दृश्य, खड़ी तुम दृढ़ हो अपने पैरों पर,
    सुख दुख तो आयें जायेंगे, रहो संतुलित लहरों पर,
    निर्बन्धा हो, खुला विश्व-नभ, पंख लगा लो, उड़ा करो,
    मेरी बिटिया पढ़ा करो।७।

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  48. बहुत सुन्दर और भावुक कर देने वाली रचना|

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  49. इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  50. पिता के स्नेह की आंच एक निस्स्वार्थ छाता है .ऐसी बिटिया आसमान के तारों से दूधगंगाओं के पार एक और दूध गंगा ढूंढ लेगी .यकीन मानिए .बहुत सुन्दर कोमल भाव की रचना .जहां तक पृथ्वी के उल्का पात से बाँझ होने की संभावना है वह बहुत ही कमतर है .और अब तो धूमकेतुओं के मार्ग को विचलित किया जा सकता है रोकेट दाग कर .आभार आप की हाज़िर ज़वाबी और हाजिरी का .

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  51. शब्द शब्द से वाक्य बनेंगे, वाक्य तथ्य पहचानेंगे,
    तथ्य संग यदि, निश्चय तब हम जग को अच्छा जानेंगे,
    ज्ञान बढ़े, विज्ञान बढ़े, तब आधारों पर निर्णय हो,
    दृष्टि वृहद, संचार सुहृद, तब क्षुब्ध विषादों का क्षय हो,
    आनन्दों का आश्रय होगा, शब्दों से नित जुड़ा करो,
    मेरी बिटिया पढ़ा करो।५।

    कितना सुंदर आदेश है, एक पिता के कर्तव्य को बखूबी निभाता हुआ ।

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  52. आपकी इस बिटिया को हार्दिक आशीर्वाद ये आपका सम्मान बहुत बढ़ाएगी ये मैं दावे के साथ कह सकता हूँ..

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  53. आपकी इस बिटिया को हार्दिक आशीर्वाद ये आपका सम्मान बहुत बढ़ाएगी ये मैं दावे के साथ कह सकता हूँ..

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  54. पिता की कविता पुत्री के नाम। सुंदर।

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  55. बहुत ही सुंदर संदेश है।

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  56. प्रभात शर्मा15/10/11 23:11

    आपका ब्लॉग पढ़कर बहुत अच्छा लगा !
    शुक्रिया.......

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  57. ममतापूर्ण रचना.....!

    सुन्दर भाव...

    सुन्दर शब्द संयोजन...!!

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  58. बहुत खुबसूरत सी रचना, प्रवीन भाई...बहुत दिनों बाद दिल को छूने वाला कुछ पढ़ा...ये रचना और उसके भाव हर उस पिता के हैं जिसके घर एक प्यारी सी बिटिया हैं, और पिता हृदय जानता हैं कठिनाइय इस कठोर ज़माने की.....कुछ कहना चाहता हैं अपने अनुभवों से...लेकिन कहे तो कैसे.....इस रचना के माध्यम से कुछ बोझ हल्का होता हैं....
    शायद आने वाले समय में इस रचना का उल्लेख जमाना करे...शुभकामनाये....

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  59. प्यारी बिटिया रानी के प्यारे पापा....कितने प्यार से समझाया है...बहुत प्यारा...सीख देता गीत!!

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  60. पिता का बेटी के नाम स्नेह भरा काव्यात्मक संदेश

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  61. है पितृत्व का बोध हृदय में, ध्यान तुम्हारा रखना है,
    मिला दैव उपहार, पालना सृष्टि श्रेष्ठ संरचना है,
    वह बिटिया धन्य है जिसको इतने प्यार से समझने वाले पिता मिले ...

    बहुत खूबसूरत कविता और सन्देश!

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  62. बिटिया की ही तरह सरल, सहज अभिव्‍यक्ति.

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  63. डॉ ओपी तिवारी से प्राप्त टिप्पणी

    bahut bahut ati sundarm bhavnatmk abhivkti ha.aapko shubh kamna.
    dr o p tiwari

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  64. बहुत अच्छी प्रस्तुति । मेरे पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

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  65. एक पिता का कर्त्तव्य बच्चों को सही मार्गदर्शन देना भी है.

    बहुत सुंदर कविता और बहुत प्यारी बिटिया.

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  66. आपकी इस अनमोल रचना को भारत सरकार के ’सर्व शिक्षा अभियान’ के लिये किये जा रहे प्रयास के पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिये ।

    अत्यंत सरल एवं शिक्षा प्रद ,बाललुभावन रचना ।

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  67. पिता का सारा दुलार हर अक्षर के हर बिन्दु में झलक रहा है ....... आज तो सिर्फ़ आशीष देने को मन कर रहा है !

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  68. मन से प्रवाहित मन में उतरती प्रेरणादायी रचना.

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  69. पितृ हृदय के सुन्दर उद्गार!

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  70. बेटियों के प्रति आपका प्यार...बहुत प्यारा.

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  71. बहुत सुल्दर शिक्षाप्रद रचना!

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  72. वाह! अद्भुत/अनमोल गीत है....
    सादर बधाई....

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  73. यही एक गुण भेंट करूँगा, और तुम्हें क्या दे सकता,
    जितना संभव होगा, घर की जीवन नैया खे सकता,
    एक सुखद बस दृश्य, खड़ी तुम दृढ़ हो अपने पैरों पर,
    सुख दुख तो आयें जायेंगे, रहो संतुलित लहरों पर,
    निर्बन्धा हो, खुला विश्व-नभ, पंख लगा लो, उड़ा करो,
    मेरी बिटिया पढ़ा करो।७।

    बहुत ही मर्मस्पर्शी रचना है……………भावविभोर कर दिया…………ऐसा ही तो हम दोनो भी सोचते है और कहते है यूँ लगा हमारे ही मन के भावो को संजोया है।

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  74. ati sundar bhaav, prabhaavkaari srijan . badhaayee.

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  75. प्यारी बिटिया के लिये स्नेही पापा की सुन्दर सीख .
    विश्वास कीजिये ,खरी उतरेगी जीवन की कसौटी पर ऐसे संस्कार पाकर !
    बिटिया और पापा दोनों काफ़ी-कुछ अनुरूप लग रहे हैं .हार्दिक शुभ-कामनायें !

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  76. शिशुओं के लिए प्रेरक शिशु गीत!!

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  77. प्यारी, भावुक कविता...मुझे बहुत पसंद आई! :)

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  78. You are blessed with a lovely daughter.

    And you have really created a master-piece, i don't think there would be any such creation on the subject.

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  79. इतना सुन्दर!
    इतना स्नेहमयी!
    अतीव मधुर! :)

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  80. सुन्दर रचना, आभार

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  81. माना तुमको गुड्डे गुड़िया पुस्तक से प्रिय लगते हैं,
    माना अनुशासन के अक्षर अनमन दूर छिटकते हैं,
    माना आवश्यक और प्यारी लगे सहेली की बातें,
    माना मन में कुलबुल करती बकबक शब्दों की पातें,
    पर पढ़ने के आग्रह सम्मुख, प्रश्न न कोई खड़ा करो,
    मेरी बिटिया पढ़ा करो।१।
    पिता के निस्स्वार्थ सेवा भाव से भीगी कविता .पितृत्व को आलोकित सम्मानित करती .बधाई .

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  82. पितृत्व का बोध ह्रदय में ध्यान तुम्हारा रखना है .......बिटिया पढ़ा करो....बेहद सुन्दर प्रेरणादायी प्रसंग....स्वयं भी पढ़ा और बिटिया को भी पढाया .....शुभ कामनाएं !!!

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  83. पर भविष्य को रखकर मन में,
    वर्तमान से लड़ा करो,
    मेरी बिटिया पढ़ा करो....

    हार्दिक शुभकामनाएं !

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  84. प्रेरणा दायक, बाल कविता .

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  85. काश मैं भी ऐसा पिता बना होता!

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  86. आपकी लेखनी को बारम्बार नमन...अद्भुत रचना है ये आपकी.

    नीरज

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  87. pita ke hruday ki abhilasha jimmedariyon ka ehsas bahut sunder..

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  88. very touching & a global poem for all the daughter in the earth

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  89. शुक्रिया भाई साहब इस प्रेरक आहट के लिए खूबसूरत भाव पूर्ण विचार कविता के लिए .

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  90. ह्रदय से निःसृत पंक्तियों में प्यार व् दुलार के साथ ही एक पिता का संसार है और सृजन धर्म का चमत्कार भी. बिटिया रानी को ढेर सारा आशीर्वाद.

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  91. नहीं! केवल आग्रह या उपदेश नहीं है इस कविता में। अक्षर-अक्षर से टपक रही है पिता के मन में हिलोरे ले रही, लाडली की चिन्‍ता। सन्‍दर।

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  92. वाह बहुत सुंदर
    उम्मीद है कि बिटिया रानी को पापा की बात समझ में आ गई होगी। और पढाई भी शुरू हो गई होगी।

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  93. स्नेहसिक्त उद्गार!!

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  94. स्नेहसिक्त उद्गार !!

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  95. बहुत अनमोल रचना है आपकी ये ... आपकी बेटी के लिए भी बहुत अनमोल !मेरी पिता ने भी मेरे लिए ऐसा ही कुछ लिखा था ....
    दिव्यताओं ने जिसको ढाला है ,
    सभ्यताओं ने जिसको पाला है,
    सारे रिश्ते है पुस्तकों जैसे ,
    बेटी रिश्तों की पाठशाला है ........

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  96. My daughter says Every girl is a princess to her father,hope now she learns what even a princess is supposed to do.

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  97. ये तो सुन्दर है। बाकी कभी बिटिया रानी को शीर्षक से एतराज हो सकता -क्या मैं पढ़ती नहीं हूं। :)

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  98. बहुत भावपूर्ण रचना,बधाई!

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  99. बहुत ही मधुर ... दिल से निकली कविता है ... हर बाप के दिल से यही पुकार मिकलती है जो शीरे शीरे गुस्से में भी बदल जाती है जब बच्चे नहीं मानते ...

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  100. कविता बहुत अच्छी लग रही थी बस अंत तक आते आते वह ...रीति यही मैं रीत रहूँ, लेकिन तू जिस घर भी जाये,
    प्रेम हृदय में संचित जितना, उस घर जाकर बरसाये,

    मुझे अच्छा नहीं लगा. क्या यह आवश्यक है कि हर बेटी को महसूस कराया जाए कि वह किसी अन्य खेत में रोपे जाने के लिए तैयार की जा रही रोप/ पौध है? शायद इससे बचना असम्भव है. बेटी को शुभकामनाएँ.
    घुघूतीबासूती

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  101. सर जी -मेरी बिटिया पढ़ा करो -- बहुत ही कोमल और सुदृढ़ विचार ! बिटिया के सर पर रंगीले छतरी , फिर भय कैसा !

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  102. है अधिकार पूर्ण हम सब पर, घर में जो है तेरा है,
    एक समस्या, आठ हाथ हैं, संरक्षा का घेरा है,
    सबका बढ़ना सब पर निर्भर, यह विश्वास अडिग रखना,
    संसाधन कम पड़ते रहते, मन का धैर्य नहीं तजना,
    छोटे छोटे अधिकारों पर, भैया से मत लड़ा करो,
    मेरी बिटिया पढ़ा करो।६।

    bahut hi mann se likhi gayi aapki ye rachna ati sundar hai ..beti ko snehashish :)

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  103. मेरी प्यारी बिटिया.....

    नन्हें फूलों की क्यारी है मेरी बिटिया
    घर भर को लगती प्यारी है मेरी बिटिया.
    एक साल हुआ पकड़ उंगली दादा की
    चलने की तैयारी है मेरी बिटिया.
    जिसने पकड़ा उसको, झट से चूम लिया
    सबकी राजदुलारी है मेरी बिटिया.
    मुझे ज़मीं पर बिठा पीठ के ऊपर चढ़कर
    मुझ पर करे सवारी है मेरी बिटिया.

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  104. मेरी प्यारी बिटिया.....

    नन्हें फूलों की क्यारी है मेरी बिटिया
    घर भर को लगती प्यारी है मेरी बिटिया.
    एक साल हुआ पकड़ उंगली दादा की
    चलने की तैयारी है मेरी बिटिया.
    जिसने पकड़ा उसको, झट से चूम लिया
    सबकी राजदुलारी है मेरी बिटिया.
    मुझे ज़मीं पर बिठा पीठ के ऊपर चढ़कर
    मुझ पर करे सवारी है मेरी बिटिया.

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  105. शानदार पोस्ट ... बहुत ही बढ़िया लगा पढ़कर .... Thanks for sharing such a nice article!! :) :)

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