12.10.11

मैकपूर्ण अनुभव का एक माह

पिछली पोस्ट में मैकबुक एयर की विस्तृत समीक्षा नहीं कर पाया था, कारण था उसकी कार्यप्रणाली को समझने में लगने वाला समय। अपनी आवश्यकतानुसार सही लैपटॉप पा जाने के बाद उस पर कार्य करना अभी शेष था। दो विकल्प थे, पहला पुराने लैपटॉप पर कार्य करते करते नये के बारे में धीरे धीरे ज्ञान बढ़ाना, दूसरा था सारा कार्य नये में स्थानान्तरित कर पूर्णरूपेण कार्य प्रारम्भ कर देना। यद्यपि मुझे मैकबुक में विण्डो चलाने की तीन विधियाँ ज्ञात थीं पर मैक पर बिना प्रयास करे उसे छोड़ देना मुझे स्वीकार नहीं था। एक शुभचिन्तक ने भी कम से कम एक माह मैक उपयोग करने के पश्चात ही कोई निर्णय लेने को कहा था। मैने मैकपूर्ण अनुभव का एक माह जीने का निश्चय किया।

सर्वप्रथम कार्य था, अपने सारे सम्पर्क, बैठक, कार्य व नोट का मोबाइल व मैक के बीच समन्वय करना। ब्लैकबेरी के डेक्सटॉप मैनेजर के माध्यम से वह कार्य कुछ ही मिनटों में हो गया। विण्डो के आउटलुक के स्थान पर मैक में तीन प्रोग्राम होते हैं, मेल, एड्रेस बुक व आईकैल। मेरा मोबाइल अब दो लैपटॉपों के बीच का समन्वय सूत्र भी है।

दूसरा था ब्रॉउज़र का चुनाव, सफारी में थोड़ा कार्य कर के देखा, क्रोम जितना सहज नहीं लगा। अन्ततः क्रोम डाउनलोड कर लिया, सारे बुकमार्क्स आदि के सहित। देवनागरी इन्स्क्रिप्ट लेआउट मैक में है, कीबोर्ड पर दो कारणों से स्टीकर नहीं लगाये, पहला अभ्यास और दूसरा कीबोर्ड का बैकलिट होना। मैं पिछले कई दिनों से आपके ब्लॉग पर टिप्पणियाँ मेरे मैक से ही बरस रही हैं, उसमें से अधिकांशतः बच्चों के सोने के बाद रात के अँधेरे में बैकलिट कीबोर्ड के माध्यम से टाइप की गयी हैं।

तीसरा था अपने समस्त लेखन को वननोट के समकक्ष किसी प्रोग्राम में सहेजना। इण्टरनेट पर चार सम्भावितों में ग्राउलीनोट्स लगभग वननोट जैसा ही था। वननोट से सभी लेखों को वर्ड्स में बदल कर मैक पर ले गया। नये रूप में उन्हें व्यवस्थित करने का कार्य लगभग आधा दिन खा गया। पिछली चार पोस्टें ग्राउलीनोट्स में ही लिखी गयी हैं। यद्यपि ऑफिस सूट का अधिक उपयोग नहीं करता हूँ पर किसी संभावित आवश्यकता के लिये ओपेन ऑफिस डाउनलोड कर लिया है।

एक टैबलेट पैड का उपयोग पुराने लैपटॉप के साथ करता था, मुक्त हाथ से लिखने व चित्रों पर आड़ी तिरछी रेखायें बनाने के लिये। अपने भावों को शब्दों के अतिरिक्त रेखाओं से व्यक्त करने के लिये वह मैक में अनिवार्य था मेरे लिये। निर्माता की साइट पर गया, उस मॉडल से सम्बद्ध मैक पर चलने वाला ड्राइवर डाउनलोड किया और इन्स्टॉल कर दिया। ६x८ इंच का पैड मैकबुक की स्क्रीन के ही आकार का है। टैबलेट पैड दोनों बच्चों को बहुत सुहाता है, बहुधा ही चित्र बनाने के लिये उसका अधिग्रहण होता रहता है, किसी प्रकार मैने भी आवारगी में बह रहे विचारों को मुक्त हस्त से व्यक्त कर दिया।

११.६ इंच की स्क्रीन में शब्द मोती से स्पष्ट दिखते हैं, फोन्ट का आकार बढ़ाना, पृष्ठों पर तीव्र भ्रमण व अन्य स्थान पर पहुँचने का कार्य उन्नत ट्रैकपैड की सहायता से आशातीत सहज हो जाता है। ४ जीबी रैम व १२८ जीबी सॉलिड स्टेट हार्डड्राईव में फाइलें व प्रोग्राम पलक झपकते ही प्रस्तुत हो जाते हैं। १ किलो के सर्वाधिक पतले लैपटॉप को कहीं भी रखकर ले जाने व कहीं भी खोलकर उस पर लिखने की सुविधा किसी सुखद अनुभव का स्थायी हो जाना है।

बैटरी एक सुखद आश्चर्य रही मेरे लिये। जब लेखन करता हूँ तो वाई फाई बन्द कर देता हूँ। विशुद्ध लेखन में ६ घंटे व विशुद्ध इण्टरनेटीय भ्रमण में ४ः३० घंटे का समय उत्पाद पर दी गयी समय सीमा से कहीं अधिक था। बैटरी को पुनः पूरा चार्ज करने में मात्र १ः३० घंटे का ही समय लगता है। इस उत्कर्ष मानक को पाने के लिये मैक ने कई महत्वपूर्ण सफल प्रयोग किये हैं जिसका शोध एक अलग पोस्ट में लिखूँगा। यह शोध भविष्य में एक अवरोध रूप में खड़ा रहेगा, विण्डो में वापस लौटने के विचारों के सम्मुख।

अभी तक की यात्रा तो संतुष्टिपूर्ण है, पूरे निष्कर्षों पर पहुँचने तक अनुप्रयोग होते रहेंगे, मैकपूर्ण अनुभव का माह प्रवाहमय बना रहेगा।

61 comments:

  1. अधुनातन तकनीक और ज्ञानवर्धक जानकारी सुरुचिपूर्ण ढंग से लेख के माध्यम से हम तक पहुँचाने के लिए आभार

    ReplyDelete
  2. अधुनातन तकनीक और ज्ञानवर्धक जानकारी सुरुचिपूर्ण ढंग से लेख के माध्यम से हम तक पहुँचाने के लिए आभार

    ReplyDelete
  3. कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है कि जैसे......


    शायद कभी मैं भी मैक इस्तेमाल करुँ....मगर हाल फिलहाल तो विन्डोज पर ही ठीक चल रहे हैं. :)

    अनेक शुभकामनायें...

    ReplyDelete
  4. तकनीक और लेखन का मणि कांचन संयोग

    ReplyDelete
  5. Macbook is really a sexy product.

    ReplyDelete
  6. मैक प्रयोक्ता होने के कारण मै यह विश्वास से कह सकता हूं कि विन्डोज पर लौटना मुश्किल है।
    मेरी माउस तक की आदत छूट गयी है।

    ReplyDelete
  7. समीक्षा के साथ यह जानकारी बहुत उपयोगी रही!

    ReplyDelete
  8. वाह!बढ़िया ज्ञानवर्धक समीक्षा|
    टैबलेट पैड का उपयोग क्या हम सीधा ब्लोगर के टेक्स्ट एडिटर में कर सकते है?

    ReplyDelete
  9. बेहद उपयोगी और आवश्यक लेख के लिए आभार प्रवीण भाई !
    स्टीव जोब्स की यह देन गज़ब का आकर्षण देती है और विशिष्ट तो है ही ! यह टिप्स देते रहना जिससे आपकी मेहनत का फायदा हम आसानी से उठा सकें !
    शुभकामनायें !

    ReplyDelete
  10. बढ़िया ज्ञानवर्धक समीक्षा| धन्यवाद|

    ReplyDelete
  11. बढ़िया प्रस्तुति |
    हमारी बधाई स्वीकारें ||

    ReplyDelete
  12. sir these are good and useful information in future to me .thanks

    ReplyDelete
  13. अच्छी जानकारी देता बेहतरीन लेख ..... प्रवाह बना रहे ..... शुभकामनायें

    ReplyDelete
  14. baap re.....aapkaa anubhav aur aapke kaary sachmuch atyant prerit kar rahen hain mujhe....

    ReplyDelete
  15. प्रयोगशाला वाला काम पूरा कर लें आप, बाद में दोस्त लोग तो हैं ही फॉलो करने के लिए। लेकिन बंधु, अव्वल तो इतनी जब्बर्दस्त मेहनत और फिर उसे यूं सिलसिलेवार साझा करने की ज़हमत। इम्प्रेस्ड।

    ReplyDelete
  16. शायद हम भी कभी मैक पर काम करेंगे।
    --------
    कल 13/10/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  17. काहे को हमरा दिल जलाय रहे हो ? जब भी एप्पल के स्टोर के आस-पास से गुजरता हूँ,एक जादुई अहसास कर लेता हूँ,क़सक सी रह गई है मन में ! अभी तक एप्पल के उत्पाद मेरी ज़द में ना आ पाए !पिछले दिनों में ही नया डेस्कटॉप लिया था,उसी से समझौता किये बैठे हैं.
    आप अनुभव करते रहें,हम बस टापते ही रह जायेंगे !

    ReplyDelete
  18. बहुत सुरुचि पूर्ण, लाभदायक जानकारी भरा लेख. ये किसी अरण्यमें पथ खोजने से कम नहीं .

    ReplyDelete
  19. सरल भाषा में कड़े अनुभव का उन्मुक्त शब्द चित्रण

    ReplyDelete
  20. hmmm... my eagerness in increasing day by day to buy one... :(
    thank you so much for details... the day will buy, will come to you only, if got stuck anywhere... :)
    the best part is tablet pad... :)

    ReplyDelete
  21. मुझे मैक का स्निप टूल सबसे अच्छा लगता है. तसवीरें कॉपी करने के लिए या डिजाईन के लिए बेहद सुविधाजनक है.

    पिंच टू ज़ूम ११ इंच मोनिटर पर भी पढ़ना आसान कर देता है, और मैक स्क्रीन क्लारिटी तो लैपटॉप में सबसे बेहतरीन है.

    आपके अनुभव से लग रहा है मैक इस्तेमाल करना उतना मुश्किल नहीं है जितना लगता है.

    ReplyDelete
  22. बहुत ही अच्‍छी जानकारी ...।

    ReplyDelete
  23. हम तो सेल फ़ोन से भी अभी अभ्यस्त नहीं हो पाये, हम ब्लैकबेरी और गूज़बेरी का अंतर भी नहीं जानते :)

    ReplyDelete
  24. चलिए हो गया सब काम...हमारी समझ में कम आया पर आपने बहुत ही अच्छी तरह समझाया. आभार.

    ReplyDelete
  25. अच्छी और उपयोगी जानकारी..धन्यवाद|

    ReplyDelete
  26. आप सब ब्लागर साथियों से कुछ कुछ तकनीकी जानकारी मिल जाती है तो हमारा भी ज्ञान बढ़ता रहता है।

    ReplyDelete
  27. मैकदा छोडकर कहाँ जाएँ!!

    ReplyDelete
  28. inn sab ko dekh k lagta hai ki hum wakahe bht aage aa gye hai duniya main

    ReplyDelete
  29. मैक कई वर्षों से लुभाता रहा है परंतु पूरी मशीन अलग होना और उसका किसी और ऑपरेटिंग सिस्टम को समर्थन न करने के कारण, कभी जा ही नहीं पाये। हालांकि लाईनिक्स और जितने भी ऑपरेटिंग सिस्टम जो कि विन्डोज के हार्डवेयर पर चल जाते हैं, सबका अनुभव ले चुके हैं। यहाँ तक कि एक समय था जब हमारी मशीन पर ४-५ ऑपरेटिंग सिस्टम होते थे।

    वैसे मैक पर जाना शायद बहुत ही कटु अनुभव होगा जैसे विन्डोज से लाईनिक्स पर जाने का अनुभव था। अभी तो विन्डोज से कहीं जाने का इरादा नहीं है। आपके अनुभवों से आगे जरूर सहायता होगी।

    ReplyDelete
  30. संजय @ मो सम कौन ? ने आपकी पोस्ट " मैकपूर्ण अनुभव का एक माह " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

    काहे को जी जलाया जाये जी, रूखी सूखी खायके ठंडा पानी पी रहे है

    ReplyDelete
  31. बहुत अच्छी सूचना देने के लिये आभार। मैक एयर से आपका इश्क अब गम्भीर संबन्ध में परिवर्तित हो रहा है, बहुत-बहुत बधाई।

    ReplyDelete
  32. pooraa istemaal kar lijiye fir batayiyega hame bhi lena

    ReplyDelete
  33. तकनीक पर इतना सहज आलेख... अद्भुद...

    ReplyDelete
  34. कोई महीना/सवा महीना से ब्‍लॉग नहीं पढ पाया हूँ। लगता है, आपकी इस पोस्‍ट की भूमिकावाली पोस्‍ट मेरे मेल बॉक्‍स में मेरी प्रतीक्षा कर रही है।

    सब कुछ अत्‍यधिक तकनीकी मामला है। मेरी समझ से पूरी तरह से बाहर। मैं अज्ञान के सुख भोग रहा हूँ।

    ReplyDelete
  35. अच्छी जानकारी मिली।

    ReplyDelete
  36. gyaanvar dhak prastuti par badhaayee

    ReplyDelete
  37. आदरणीय प्रवीण जी ....मैक की समीक्षा करके आपने हमारा ज्ञानवर्धन किया है और शब्दों का तारतम्य ऐसा कि जैसे अपने पसंद की कोई ग़ज़ल पढ़ रहा हूँ ....आपकी प्रवाहपूर्ण भाषा का कोई जबाब नहीं .....!

    ReplyDelete
  38. kafi achhi jankaari di Praveen ji aapne....aapki pichli post Steve Jobs ke nidhan ke baare mein ,....is mahaan aatma ke liye ek shradhanjali hai.

    ReplyDelete
  39. मैं तो अचम्भित हूँ। इतनी तकनीकी खुरपेंच में खुद को उलझा नहीं सकता। अनाड़ी जो ठहरा।

    आपकी बात ही कुछ और है...!

    ReplyDelete
  40. छोटी-छोटी बातों की सिसिलेवार जानकारी देने का अंदाज़ पसंद आया.

    ReplyDelete
  41. विस्तृत जानकारी दी है भाई साहब आपने "मैक "के विषय में आहिस्ता आहिस्ता हम भी वाकिफ हो जायेंगे कम्प्यूटरी भाषा से .

    ReplyDelete
  42. क्लिष्ट तकनीकि ... सरल शब्दों में समझाने का प्रयास ... पर अभी समझने की हालत नहीं है :)

    लेकिन बहुत लोगों को इस जानकारी से लाभ मिलेगा .

    ReplyDelete
  43. बहुत उपयोगी जानकारी...

    ReplyDelete
  44. हमने इन्डेन्ट लगा दिया है . दिवाली पर मैक की डेलिवरी होनी है . फिर हम आपके अनुभव इस्तेमाल में लायेंगे .

    ReplyDelete
  45. महंगा है इसीसे सब लोगों के पहुँच के बाहर । पर आसान है और तेज भी ।
    आप का पैड अच्छा लगा ।

    ReplyDelete
  46. कमी समझाने वाले की नहीं समझनेवाले की है -क्या किया जाय जब सब सिर के ऊपर से निकलता चला जाय !

    ReplyDelete
  47. आपकी सफलता कई और धर्म-परिवर्तन करायेगी, ऐसा लगता है।

    ReplyDelete
  48. काफी महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी उपलब्ध करने के लिए आभार .

    ReplyDelete
  49. बढ़िया ज्ञानवर्धक जानकारी,

    विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

    ReplyDelete
  50. हम भी धर्म परिवर्तन को ललच रहे हैं :)

    ReplyDelete
  51. ई पता नहीं क्या क्या आप लिख गए और पता नहीं क्या क्या कर दिए, मुझे समझ में ही नहीं आया। मैं तो इस मामले में तो इतना कमजोर हूं कि कई दिनों से कंप्यूटर खुल रहा था, लेकिन उसके स्क्रीन पर कुछ नजर नहीं आ रहा था। पहले तो उसके प्लग वगैरह हिला डुला कर देखा, लेकिन मुझे लगा कि कोई भयंकर गड़बड़ी है, जो नियंत्रण से बाहर की चीज है। फिर मैने एक इंजीनियर भाई को फोन किया। वह ३०० रुपये फीस पर आने को तैयार हुआ। आने के बाद उसने सीपीयू में से एक तार, जो नट बोल्ट से कसकर बंधा होता है, उसे निकाला, फिर उसे वहीं लगाकर कस दिया। कंप्यूटर चलने लगा और अभी भी चल रहा है। इंजीनियर साब ३०० रुपये लेकर चले गए। मेरे एक मित्र ने कहा कि अब अगर कोई गड़बड़ी हो तो पहले सभी तार खींचकर और उसको फिर से घुसेड़कर देख लीजिएगा, फिर किसी को बुलाइयेगा :(

    ReplyDelete
  52. महत्वपूर्ण अपडेट !शुक्रिया ब्लॉग पर दस्तक का .

    ReplyDelete
  53. बहुत बढ़िया लैपटॉप है ! हमें तो मम्मी का लैपटॉप से खेलने को नहीं मिलता है ... :(

    ReplyDelete
  54. accha hai aapke sath hum bhi seekhte ja rahe hain....

    ReplyDelete
  55. मेरा अगला नोटबुक मैक ही होगा!
    ऐसा नहीं की आपकी ये पोस्ट पढ़ने के बाद मैं ऐसा कह रहा हूँ, बल्कि मुझे खुद खरीदने का दिल है बहुत दिन से :)

    ReplyDelete
  56. प्रवीण जी,
    iOS5 पर अपने आई पैड को अपग्रेड कर लिजिये, हिन्दी इन्स्क्रिप्ट की बोर्ड आ गया है। हिन्दी आटो सजेस्ट और स्पेल चेकर भी है :)

    मैने कल ही अपग्रेड कीया। और अपग्रेड से पहले बैक अप ले लिजियेगा!

    ReplyDelete
  57. ये सच है की बेटरी का आनंद लेना है तो मेक ... वैसे और भी कई लिखाज़ से ये एक अच्छा कम्पूटर है इसमें कोई दो राय नहीं है ...

    ReplyDelete
  58. तो मैक के साथ आपका प्यार परवान चढ़ रहा है। मैक प्रयोग करने वाले हमारे पुराने मित्रों में आलोक जी, आशीष जी आदि शामिल हैं। उनसे तकनीकी मार्गदर्शन ले सकते हैं।

    तो आप अपने फोटो में जो कैप्शन लगाते हैं वो इस पैड का कमाल है। पर आप इस पर इतनी सफाई से कैसे लिख लेते हैं, अक्सर टचस्क्रीन पर लिखने में कागज पर पैन की तरह सही तरीके से नहीं लिखा जाता?

    ReplyDelete