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30.11.16

लिली पाण्डेय

लिली रेलवे बोर्ड में वरिष्ठ अधिकारी हैं और कार्मिक विभाग का उत्तरदायित्व वहन कर रही हैं।बंगलुरु में उनके साथ कार्य करने का सौभाग्य मिला है। कला और साहित्य में रुचि है। रेलवे में कला के विषय परसफरनाम की पुस्तिका की सहलेखिका भी रही हैं। उसी के आगामी अंक के लिये लिली ने एक कविता लिखी थी। पढ़ने को दी, बहुत अच्छी लगी, गुनगुनायी और हिन्दी में अनुवाद कर दी। शाब्दिक के स्थान पर भावानुवाद किया है। आप भी पढ़ें।

Whirl of wheels
Setting in motion the celestial machinery
Turning to infinity, to eternity
An epic adventure beyond 
Beginnings & denouement 
Spinning a universe of words, forms and shapes
A cadence of dervishes
The dance of Shiva
Spasm of creation ..

~ Lily Pandeya

अथ कालचक्र निःश्वास नाद,
बढ़ता गतिमय वैश्विक प्रमाद,
शाश्वत, अनंत
निर्बन्ध छन्द,
आगत स्वागत, सब मार्ग सुप्त,
यात्रा अनादि, संहारमुक्त
शब्दों, आकृति आकारों में 
जग घूर्ण पूर्ण विस्तारों में
दरवेशी तालों पर विशेष
नर्तन नवनूतन शिवप्रवेश
घनघुमड़ उमड़ती सृष्टिशेष


भावानुवाद - प्रवीण पाण्डेय

लिली के साथ, बीजिंग में