8.5.13

लहरें

तकते हैं,
लहरें आती और जाती हैं।

लखते हैं,
कुछ लाती, कुछ ले जाती हैं।

छकते हैं,
इठलाती, हमें खिलाती हैं।

इनके जैसे ही सतत रहें,
हर पल उद्भव का राग यहाँ,
नत हो जाना, फिर फिर आना,
आरोहण का अनुनाद यहाँ।

हो मत्त, व्यग्र, चंचल, चपला,
दौड़ी आती विरही कल कल,
जड़ रूप मूक सागर तट पर,
आलिंगन का आग्रह निश्छल।

यह प्रेम नहीं, मद आकुल है,
जीवट मन है, कब से ठहरा,
यह विष फेनों का नर्तन भी,
आक्रोश व्यक्त होता गहरा।

एक द्वन्द्व मूर्त, स्तब्ध विश्व,
आकाश चेत, सो जाता है,
सागर धरती नित लीलामय,
इतिहास रेत हो जाता है।

इनकी गतियों सा बने रहें,
यदि शेष समय जो मिला क्षणिक,
संग जीवन हम भी बह जायें,
जब समय शेष न रहे तनिक।

42 comments:

  1. उम्दा रचना...वाह!

    संग जीवन हम भी बह जायें,
    जब समय शेष न रहे तनिक।

    ReplyDelete
  2. लहरों के सन्दर्भ में विभिन्न भावों का उत्कृष्ट वर्णन

    ReplyDelete
  3. अद्भुत रचना,
    यह प्रेम नहीं, मद आकुल है,
    जीवट मन है, कब से ठहरा,
    यह विष फेनों का नर्तन भी,
    आक्रोश व्यक्त होता गहरा।

    ReplyDelete
  4. Profound. The beginning is so beautiful and poetic. Love your poems. :)

    ReplyDelete
  5. बेहद सुंदर रचना , आभार आपका ...

    हो मत्त, व्यग्र, चंचल, चपला,
    दौड़ी आती विरही कल कल,
    जड़ रूप मूक सागर तट पर,
    आलिंगन का आग्रह निश्छल।

    ReplyDelete
  6. जीवन की हलचल जैसी ही है लहरों की प्रवृत्ति. सुन्दर.

    ReplyDelete
  7. इनके जैसे ही सतत रहें,
    हर पल उद्भव का राग यहाँ,
    नत हो जाना, फिर फिर आना,
    आरोहण का अनुनाद यहाँ।

    क्या यही जीवन का दूसरा रूप नही है?

    बहुत ही उल्लासमयी रचना, शुभकामनाएं.

    रामराम

    ReplyDelete
  8. वाह !!! बहुत सुंदर अद्भुत प्रस्तुति,,,आभार

    RECENT POST: नूतनता और उर्वरा,

    ReplyDelete
  9. सुन्दर. हेमिंग्वे की ओल्ड मेन एंड दी सी याद आ गई

    ReplyDelete
  10. गत्यात्मक रचना ...

    ReplyDelete
  11. आपकी कविताओं में समाहित जीवन दर्शन बहुत प्रभावित करता है ....हमेशा की तरह एक उत्कृष्ट रचना

    ReplyDelete
  12. बहुत ही सुन्दर और अद्भुत रचना,आपका आभार.

    ReplyDelete
  13. बहुत सुन्दर शब्द संयोजन के माध्यम से जीवन और समुद्र में उठती लहरों का बढ़िया व्याख्या.

    latest post'वनफूल'

    ReplyDelete
  14. संग समय हम भी बह जाएँ .
    लहरों सा जीवन सागर में समाये !
    उत्कृष्ट लेखन !

    ReplyDelete
  15. सागर और धरती की तरह ही लीलामय व गतिशील जीवन जीना और इतिहास की तरह समय का निःशेष होजाना ही प्राप्य क्षणों का सदुपयोग है । जीवन को बहुत ही गहरे दर्शन के साथ देखते हैं आप ।

    ReplyDelete
  16. यह प्रेम नहीं, मद आकुल है,
    जीवट मन है, कब से ठहरा,
    यह विष फेनों का नर्तन भी,
    आक्रोश व्यक्त होता गहरा...

    गहरी बात ... ये सुख भी है, दुख बजी है ... आक्रोच भी है ... जीवन की लालसा भी है ...
    इन लहरों में सभी कुछ व्याप्त है ...

    ReplyDelete
  17. लहरों से हम चलना सीखें ...
    गहन जीवन दर्शन छिपा है इन आती जाती लहरों में.

    ReplyDelete
  18. इनकी गतियों सा बने रहें,
    यदि शेष समय जो मिला क्षणिक,
    संग जीवन हम भी बह जायें,
    जब समय शेष न रहे तनिक।
    अद्भुत,सुन्दर,उम्दाउत्कृष्ट,रचना .

    ReplyDelete
  19. ब्यूटीफुल पोएट्री। वाह।

    अपनी पंचतत्व में जल तत्व पर लिखी पोएम में मैंने भी यह चित्र यूज़ किया था।

    ReplyDelete
  20. वाह हर शब्द अपने निशां छोडती खुबसूरत अंदाज़ में अपनी बात कहती |
    सुंदर रचना |

    ReplyDelete
  21. ले चल मुझे भुलावा देकर मेरे नाविक धीरे धीरे

    ReplyDelete
  22. जीवन भी लहरों की तरह हिलोरे लेता रहता है।

    ReplyDelete
  23. गहन जीवन दर्शन.. अद्भुत रचना,आभार..

    ReplyDelete
  24. इतिहास रेत हो जाता है

    ReplyDelete
  25. सागर किनारे उपजी सुन्दर रचना।

    ReplyDelete
  26. carpe diem is all you gotta do
    loved it :)

    ReplyDelete
  27. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  28. ऐसी शब्‍दावली तो अब अपवादस्‍वरूप ही देखने/पढने को मिलती है।

    ReplyDelete
  29. स्वस्थ जीवन-दर्शन ,प्रभावशाली शब्दावली में पढ़ने का आनन्द ही निराला है -आभार !

    ReplyDelete
  30. निराला अंदाज़ है,....

    लिखते रहिये ...

    ReplyDelete
  31. गहनता लिए ......

    ReplyDelete
  32. वाह . जीवन अभी है और यहीं है लेकिन दुर्भाग्य से हम अक्सर कहीं और होते हैं .

    ReplyDelete
  33. गहन भाव लिये अनुपम प्रस्‍तुति ...
    आभार

    ReplyDelete

  34. गहन अभिव्यक्ति,जीवन दर्शन की.
    हर शब्द,परिभाषित करता है,जीवन की,सार्थकता-निर्थकता को.
    ’इतिहास रेते हो जाता है’
    ”जब समय शेष न रहे तनिक’
    संग जीवन हम भी बह जांये’

    ReplyDelete
  35. बहुत ही अच्छी कविता लहरिल प्रवाह के साथ |

    ReplyDelete
  36. लहरों को देख चन्द्रमा की शक्ति का एहसास होता है । कोई इतना शीतल और इतना दूर होकर भी कितना प्रभावकारी हो सकता है ।

    ReplyDelete
  37. Your poetry reminded me of evenings I had spent on beaches in Goa. I used to feel that waves are stubborn lovers not ready to give up!

    ReplyDelete
  38. आप्लावित करता हुआ मन..

    ReplyDelete
  39. बेहतरीन रचना !!

    ReplyDelete
  40. मुझे आप को सुचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि
    आप की ये रचना 17-05-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल
    पर लिंक की जा रही है। सूचनार्थ।
    आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाना।

    मिलते हैं फिर शुकरवार को आप की इस रचना के साथ।

    ReplyDelete
  41. आदरणीय आपकी इस सार्थक रचना को 'निर्झर टाइम्स' पर लिंक करके कुछ गति देने का प्रयास किया गया है।कृपया http://nirjhar-times.blogspot.com पर अवलोकन करें। आपकी प्रतिक्रिया सादर आमंत्रित है।

    ReplyDelete