लुटे तभी थे,
और आज भी,
लुटे जा रहे।
जो जीते थे,
अब रीते हैं,
जीत रहे जो,
वे भी भर भर,
मन में, मनभर,
अधिकारों को,
घुटे जा रहे।
दूल्हा, दुल्हन,
अपनी धुन में,
हम सब दर्शक,
बेगाने से,
बने बराती,
जुटे जा रहे।