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15.3.15

आये तुम

स्वप्न देखने का जीवन में, साहस तो कर बैठे थे ।
आये तुम, पीछे पीछे, देखो स्वप्न और आ जायेंगे ।।१।।

कठिन परिस्थियों में भी, एक किरण दिखी थी आशा की ।
आये तुम, अब हम कष्टों को भी आँख दिखाते जायेंगे ।।२।।

भीड़ भरे आहातों के एक कोने में चुपचाप खड़े ।
आये तुम, मन की बात आज दीवारों से चिल्लायेंगे ।।३।।

सुन्दरतम की बाट जोहते, अब तक जगते रहते थे हम ।
आये तुम, लाये गोद सुखद, हम चुपके से सो जायेंगे ।।४।।

22.6.13

औरों को हम

आदर्शों की छोटी चादर,
चलो ढकेंगे,
औरों को हम।

आंकाक्षा मन पूर्ण उजागर,
चलो छलेंगे,
औरों को हम।

इसकी उससे तुलना करना,
चलो नाप लें,
औरों को हम।

निर्णायक बन व्यस्त विचरना,
चलो ताप लें,
औरों को हम।

हमने ज्ञान निकाला, पेरा,
चलो पिलायें,
औरों को हम।

बिन हम जग में व्याप्त अँधेरा,
चलो जलायें,
औरों को हम।

पूर्ण नियन्त्रण, ध्येय महत्तम,
चलो बतायें,
औरों को हम।

फिर क्यों उछलें, अत्तम-बत्तम,
चलों सतायें,
औरों को हम।

काँटे जन जन, पुष्प मधुर हम,
चलो सजा दें, 
औरों को हम।

सुप्त प्राण, हो गुञ्जित मधुबन,
चलो बजा दें,
औरों को हम।

जब हम जागे,
तभी सभी का उदित सबेरा,
जब हम आगे,
तब विकास पथ रत्न बिखेरा,

हम तो हम हैं,
तुम हो, तम है,
हम साधेंगे, सारी रचना,
हम ढोते हैं, जग संरचना,
धर्म हमारा, कर्म हमारा,
न समझो तुम मर्म हमारा,

औरों के हम, समझे जन जन,
यही सिखाते, औरों को हम।