स्वप्न देखने का जीवन में, साहस तो कर बैठे थे ।
आये तुम, पीछे पीछे, देखो स्वप्न और आ जायेंगे ।।१।।
कठिन परिस्थियों में भी, एक किरण दिखी थी आशा की ।
आये तुम, अब हम कष्टों को भी आँख दिखाते जायेंगे ।।२।।
भीड़ भरे आहातों के एक कोने में चुपचाप खड़े ।
आये तुम, मन की बात आज दीवारों से चिल्लायेंगे ।।३।।
सुन्दरतम की बाट जोहते, अब तक जगते रहते थे हम ।
आये तुम, लाये गोद सुखद, हम चुपके से सो जायेंगे ।।४।।
आये तुम, पीछे पीछे, देखो स्वप्न और आ जायेंगे ।।१।।
कठिन परिस्थियों में भी, एक किरण दिखी थी आशा की ।
आये तुम, अब हम कष्टों को भी आँख दिखाते जायेंगे ।।२।।
भीड़ भरे आहातों के एक कोने में चुपचाप खड़े ।
आये तुम, मन की बात आज दीवारों से चिल्लायेंगे ।।३।।
सुन्दरतम की बाट जोहते, अब तक जगते रहते थे हम ।
आये तुम, लाये गोद सुखद, हम चुपके से सो जायेंगे ।।४।।