14.7.26

वह क्षण भर है, पर जीवन है


गत क्षण मन जिस पर, लब्ध वही, आगत क्षण का प्रारब्ध वही,

इस गत आगत के मध्य व्यक्त, वह क्षण भर है, पर जीवन है।


स्मृति में छिटके भाव शेष, कल्पित अघटित, सम्भाव्य शेष,

है सब स्वाहा, क्षमता मन की, वह क्षण भर है, पर जीवन है।


अनगिन आकर्षण क्षेत्र बने, आते अन्तर्गत, नेत्र घने, 

मन का विशेष से जुड़ जाना, वह क्षण भर है, पर जीवन है।


जब सुप्त रहे, सब रहा रिक्त, किस गत भ्रमवत, बह गया चित्त, 

यह शून्य-सकल सम्पर्क बिन्दु, वह क्षण भर है, पर जीवन है।


एक क्षण आया, जीवन गतिमय, दूजा, सब गतियाँ, पूर्ण विलय,

दो क्षण भीतर, है पृथक पृथक, क्षण क्षण भर है, पर जीवन है।

12 comments:

  1. Salim Raza14/7/26 09:03

    Bahut Sundar, sir,

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  2. Anonymous14/7/26 09:51

    प्रणाम सर🙏🙏
    प्रेरणादायक रचना 🙏🙏

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  3. Anonymous14/7/26 09:56

    अतिसुन्दर

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  4. Anonymous14/7/26 09:58

    जीवन, अनंत संभावनाओं से जुड़ा जो ब्रह्माण्ड भर है,
    पर वह तो कल है ।
    जो बीत गया वो,
    यादों में भर है ।
    वह क्षण भर है, पर जीवन तो है।

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  5. Anonymous14/7/26 11:32

    Atulya..sir 🙏🙏

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  6. Anonymous14/7/26 11:46

    भावपूर्ण यथार्थ

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  7. Anonymous14/7/26 12:03

    पल पल परिवर्तित प्रकृति वेश ... पन्त

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  8. Anonymous14/7/26 12:50

    Hard truth of life. Great realisation.👌🙏

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  9. Anonymous14/7/26 16:01

    वाह,भैया,अद्भुत।

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  10. Anonymous21/7/26 14:12

    Bahut Sunder 🙏🙏

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  11. अतिसुन्दर 🙏

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  12. Anonymous23/7/26 00:37

    जीवन के सत्य की अभिव्यक्ति,वह क्षण ही है, जो जीवन है

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