7.5.14

झम झमाझम

ढाढ़सी मौसम,
बस रसद कम,
जी ले लल्ला,
बैठ निठल्ला,
पानी बरसे,
झम झमाझम। 

24 comments:

  1. हा हा हा , अच्छे दिन आने वाले हैं ।

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  2. कहाँ से बरसेगा झमाझाम पानी उसे तो हम ही रोक रहें है भाई साहब

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  3. -सुंदर रचना...
    आपने लिखा....
    मैंने भी पढ़ा...
    हमारा प्रयास हैं कि इसे सभी पढ़ें...
    इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना...
    दिनांक 08/05/ 2014 की
    नयी पुरानी हलचल [हिंदी ब्लौग का एकमंच] पर कुछ पंखतियों के साथ लिंक की जा रही है...
    आप भी आना...औरों को बतलाना...हलचल में और भी बहुत कुछ है...
    हलचल में सभी का स्वागत है...

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  4. waah ... boondon ka naad .... aur shandon ka khel ... lajawab ...

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  5. " पावस ऋतु थी पर्वत प्रदेश
    पल-पल परिवर्तित प्रकृति वेष।"
    पन्त

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  6. शुकुन के पल. सुंदर रचना .

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  7. ढाढ़सी मौसम क्या है? ढाढ़स वाला?

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  8. Bin mausam barsaat kya suhani lagti hai :)

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  9. बहुत सुन्दर झम झमाझम.

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  10. ढाढ़सी मौसम- काली घटाएँ हौंसला देती हैं
    बस रसद कम- बरसते कम हैं
    जी ले लल्ला-जीवन चलता रहेगा
    बैठ निठल्ला-इन्तजार न कर
    पानी बरसे-सुख समृद्धि आएगी
    झम झमाझम। बढ़ती जाएगी ----- इसके लिए मेहनत कर । साथी ने कहा व्याख्या करके दिखाओ तो सोचा आपसे भी बाँट लूँ । ब्लाग बुलेटिन का आभार

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  11. बहुत बढिया..

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  12. और खासतौर पर जब इस गर्मी के मौसम में अचानक बादलों के छा जाने से झमझमा हो जाती है तब तो कहना ही क्या।।। बेहतरीन प्रस्तुति।।।

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  13. वाह. वाह. बनारस का मौसम उघड गया.

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  14. वाह बरस गया यहाँ भी :)

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  15. गंभीर चिन्तन-मनन करने के बाद यह बरसात की झमाझम - बहुत रिलीफ़ मिला होगा ! हमें भी अच्छा लगा .

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  16. चंद पंक्तियाँ मगर असरदार!

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  17. बरसो राम धडाके से............।

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  18. हाहा...खूब कविताएं लिख रहे इस समय :) :)

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  19. जबरदस्त...

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