15.5.13

दुआ सबकी मिल गयी, अच्छा हुआ

एक माह पहले जन्मदिन पर ढेरों बधाइयाँ आयी थीं, मन सुख से प्लावित हो गया था। आँखें बन्द की तो बस यही शब्द बह चले। यद्यपि फेसबुक पर इसे डाल चुका था, पर बिना ब्लॉग में स्थान पाये, बिना सुधीजनों का स्नेह पाये, रचना अपनी पूर्णता नहीं पा पाती है।

दुआ सबकी मिल गयी, अच्छा हुआ,
चिहुँकता हर बार मन, बच्चा हुआ,
कुछ सफेदी उम्र तो ले आयी है,
हाल फिर भी जो हुआ, सच्चा हुआ।

दिन वही है, बस बरसता प्यार है,
इन्द्रधनुषी सा लगे संसार है,
मूक बहता, छद्म, दुविधा से परे,
उमड़ता है, नेह का व्यापार है।

लाज आती, कोई आँखों पर धरे,
शब्द मधुरिम कर्णछिद्रों में ढरे,
कुटिल मन की गाँठ, दुखती क्षुद्रता, 
कोई तत्पर, विहँस बाँहों में भरे। 

नित्य निद्रा में अकेला, किन्तु अब,
स्वप्न में भी संग चले आयेंगे सब,
आज होगा एक जलसा देखना,
छन्द छलकें, हृदय मिल जायेंगे जब।

मैॆ रखूँगा साथ, इस विश्वास को,
प्रेमपोषित इस अनूठी प्यास को,
कल सबेरा पूर्णतः उन्नत खिले,
साध लूँगा प्रकृति की हर साँस को।

55 comments:

  1. जन्मदिन की अनगिन शुभकामनायें !

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  2. बहुत सुंदर। जन्मदिन की बधाई!

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  3. जन्मदिन पर हार्दिक बधाइयाँ व शुभकामनाएँ

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  4. वाह, बहुत ही अच्छी कविता.. जन्मदिन की बहुत बधाई

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  5. फ़िर से मुबारक!

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  6. जन्मदिन की अनगिन शुभकामनायें !

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  7. कच्ची रसीद अब पक्की हो गई ।

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  8. जन्मदिन की शुभकामनाएँ!
    देर से सही।

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  9. बहुत ही अच्छी सी प्यारी सी कविता |

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  10. खुशी इस बात की है कि फेसबुक के प्रति लोगों की असीम आसक्ति के चलते भी आपने ब्लॉग को अधिक महत्वपूर्ण समझा.शुभकामनाएं

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  11. बढ़िया आभार प्रकट किया है प्रवीण जी ..
    बधाई !

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  12. जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवं दीर्घ ,सुख-शान्तिमय जीवन हेतु शुभकामनाएँ !

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  13. प्रवीण जी जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवं बहुत बहुत शुभकामनाएं..

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  14. आशाएं और विशवास आपका जीवन सदैव खुशियों से भरा रहे .....ढेरों शुभकामनायें

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  15. पिछले माह जन्मदिन था ..... पता ही नहीं चला .... देर आए दुरुस्त आए ..... देर से ही सही जन्मदिन की अनेकों शुभकामनायें .... सुंदर भाव से सुसज्जित सुंदर रचना ....

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  16. लीजिये पाण्डेय जी, एक बार फिर हमारी ओर से हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनायें स्वीकार कीजिये !

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  17. दोस्तों का प्यार आपकी इस कविता में छलक आया है. अशेष शुभकामनाएँ!

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  18. Replies
    1. नित्य निद्रा में अकेला, किन्तु अब,
      स्वप्न में भी संग चले आयेंगे सब,
      आज होगा एक जलसा देखना,
      छन्द छलकें, हृदय मिल जायेंगे जब।.........बहुत सुन्‍दर। दुआ और जलसा शब्‍द हटा दें कविता से तो सोने पे सुहागा हो जाएगा।

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  19. एक बार फिर हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनायें

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  20. कितनी सुन्दर कविता ...वाह .

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  21. तो इस बार ब्लॉग जगत की ओर से जन्मदिन की बधाइयाँ. आप निरंतर इस साहित्य सृजनगाथा को निरंतर आगे बढ़ाते रहें. शुभकामनाओं सहित.

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  22. एक बार फिर से जन्म दिन की बधाइयाँ। ख़ुश रहें और ऐसे ही साहित्य सेवा करते रहें।

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  23. आपकी यह प्रस्तुति कल के चर्चा मंच पर है
    धन्यवाद

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  24. इस सुंदर रचना से आभार प्रदर्शन इसे और भी सुंदर बना गया, शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  25. फिर से जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएँ। सुन्दर पंक्तियाँ :)

    नये लेख : 365 साल का हुआ दिल्ली का लाल किला।

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  26. देर से ही सही जन्मदिन की ढेरों बधाइयां बहुत सुन्दर कविता रची है इसके लिए भी बधाई

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  27. Anonymous15/5/13 22:43

    जन्म - दिवस ही नहीं , आपका सारा जीवन ....
    आनंदित हो , तृप्ति- युक्त हो , कृपा करें परमेश्वर

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  28. ये बर्थडे ट्रीट भी शानदार है।

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  29. आभार बताता हैं, हम जिन्दा हैं,जिंदादिल भी।वो हमें हल्का करता हैं, और जीवन को जस तस स्वीकार करता हैं .

    जन्मदिन मुबारक .

    हमारा भी अभी ही गया हैं, कुछ लिखा था:
    एक बसंत और बीता.
    उम्र का प्याला और रीता.
    http://rahulpaliwal.blogspot.in/2010/05/blog-post_6230.html

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  30. बहुत सुन्दर भावनात्मक अभिव्यक्ति .मन को छू गयी आभार . कायरता की ओर बढ़ रहा आदमी ..

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  31. "पी पी" आज पपीहे बोल
    घड़ी सुहानी है अनमोल
    खुशियों का पहना दे ताज
    जन्म दिवस पी पी का आज..............

    हैप्पी बर्थ डे.................

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  32. जन्मदिन की अनेकानेक शुभकामनाये।।।।।
    सुन्दर पोस्ट

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  33. सुन्दर पंक्तियों में आभार प्रदर्शन का अनूठा रंग है,आपको भी आभार.

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  34. दुआएं मिलती रहें ... बढते हुए भी इंसान अगर बच्चा रह सके तो फिर बात ही क्या ...
    बहुत सुन्दर भावमय गीत ...

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  35. स्नेह व शुभकामनाओं के प्रति ऐसा भावपूर्ण उल्लासमय आभार । वाह प्रवीण जी । आपका जन्मदिन तो नही मालूम फिर भी आप शतायु हों स्वस्थ व प्रसन्न रहें यही कामना है ।

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  36. जिंदगी फूल सी हो, हर एक पल खुशबू बिखरे
    हर एक लम्हा सुबह जैसी ताजगी लाये
    हर दिन कलम नई कविता, नए छंद रचे
    इतना मिले कि बांटे बिन रहा न जाए।

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  37. नित्य निद्रा में अकेला, किन्तु अब,
    स्वप्न में भी संग चले आयेंगे सब,
    आज होगा एक जलसा देखना,
    छन्द छलकें, हृदय मिल जायेंगे जब।

    ...बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति...एक बार फ़िर से जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें!

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  38. बहुत सुंदर...देर सही, बधाई स्‍वीकारें

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  39. बहुत श्रेष्‍ठ कृति।

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  40. Belated Happy Bday ...treat shandaar hai

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  41. शुभकामनायें ...

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  42. Anonymous17/5/13 11:58

    der se sahi ..... janmdin kee hardik shubhkamnaye

    dhiru singh
    darvaar

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  43. कल सबेरा पूर्णतः उन्नत खिले,
    साध लूँगा प्रकृति की हर साँस को।
    अनुपम भाव संयोजन .... अनंत शुभकामनाएँ एक बार फिर से
    सादर

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  44. जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाये, बिलम्बित ।

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  45. Praveen ji,
    Vilamb se hi sahi Janm divas ki hardik shubhkamnayen sveekaar karen.....
    aapki yah rachna bhi bahut achchhi lagi.
    shubhkamnaon ke sath.
    Poonam

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  46. Anonymous17/5/13 21:28

    Janm din ki bahut bahut badhai Praveen ji ....bahut hi pyari rachna hai, khas taur par yah panktiyan कल सबेरा पूर्णतः उन्नत खिले,साध लूँगा प्रकृति की हर साँस को....

    Manju Mishra
    www.manukavya.wordpress.com

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  47. बहुत ही सुन्‍दर लगीं ये पंक्तियॉं -

    कल सबेरा पूर्णतः उन्नत खिले,
    साध लूँगा प्रकृति की हर साँस को।

    'देर आयद, दुरुस्‍त आयद' की तर्ज पर, जन्‍म दिन की बधइयॉं और शुभ-कामनाऍं स्‍वीकार करें।

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