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15.1.14

जय हो, जय हो

संसाधन हैं, 
तन्त्र बने हैं, 
घर पलते हैं,
आदि व्यवस्था,
देश बह रहा,
मध्यम मध्यम,
जीवन धो लो,
मिल कर बोलो,
जय हो, जय हो।

मत इतने हैं,
मति जितने हैं,
तर्क घिस रहे,
धुँआ धुँआ जग,
सबकी सुनकर,
सबकी गुनकर,
भाव न खोलो,
मिल कर बोलो,
जय हो, जय हो।

क्षुब्ध तथ्य यह,
बात ज्ञात है,
आज रात है,
कल दिन कैसा,
जैसा भी हो,
अभी नींद का,
मोह न छोड़ो,
मिल कर बोलो,
जय हो, जय हो।

कल की चिन्ता,
महाकाय सी, 
आज ठिठुरता,
घबराया सा,
मस्तक फिर भी,
धीरज पाले, 
चुपके रो लो,
मिल कर बोलो,
जय हो, जय हो।

परिवर्तन हो,
आवश्यक है,
स्थिरता में,
कहाँ लब्ध क्या,
अपना अपना,
सोंधा सपना,
कल ही बो लो,
मिल कर बोलो,
जय हो जय हो।

जिसका जितना,
भाग्य लिखा हो,
उसकी उतनी,
जय तो होगी,
किन्तु हृदय यह,
बात न होगी,
सबके हो लो,
सबकी बोलो,
जय हो, जय हो।