29.10.26

स्वप्न गतिमय


स्वप्न उद्वेलन अतुल, मन मौन घर्षण,

स्वप्न स्वाहा भाव में जीवन समर्पण।


स्वप्न अवसर, सुप्त क्षमता, समय आकुल,

स्वप्न घन संवेदना, मन सतत व्याकुल। 


स्वप्न लम्बे, बाँह में जीवन समाये,

स्वप्न निष्ठुर, राह में कुछ भी न भाये।


स्वप्न अक्षर त्याग के, गुञ्जित प्रबलतम,

स्वप्न रत अनुराग में, विचलित विरलतम।


स्वप्न गुरुतम, विगत जीवित ऋण चुकाना,

स्वप्न दृढ़ता का प्रदर्शन, प्रण निभाना।


स्वप्न कुछ इतने बड़े, हैं दृष्टि बाधित,

स्वप्न बिरले, प्रथम पग में ही पराजित।


स्वप्न शत, वंचित, न पूरे हो सके हैं,

स्वप्न संचित, आस तकते, मन बसे हैं।


स्वप्न जागृत, जग प्रवर्तित, लगन पोषित,

स्वप्न गतिमय, प्रकृति, संरचना सुशोभित।

2 comments:

  1. Amit nayak29/10/26 05:31

    बहुत सुंदर सर

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  2. बेहतरीन।

    संतोष त्रिवेदी

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