मन में दुख का भार उठाये,
अपने बिम्बों में सकुचाये,
भीगी पलकों में आँखों की,
मन के गहरे भाव छिपाये,
कब तक अँसुअन को रोकोगे,
कब तक झूठे बहलाओगे,
कब तक धैर्य भरी मुस्कानें,
अपने अधरों पर लाओगे ?
अँसुअन को अब बह जाने दो,
कहते हैं जो, कह जाने दो ।