न दैन्यं न पलायनम्
Showing posts with label
आँसू
.
Show all posts
Showing posts with label
आँसू
.
Show all posts
24.9.14
कह जाने दो
›
मन में दुख का भार उठाये , अपने बिम्बों में सकुचाये, भीगी पलकों में आँखों की, मन के गहरे भाव छिपाये, कब तक अँसुअन को रोको...
13 comments:
26.2.11
एक कंधा, सुबकने के लिये
›
धरती को कैसा लगता होगा, जब कोई आँसू की बूँद उस पर गिरती होगी ? निश्चय मानिये, यदि आप सुन सकते तो उसकी कराह आपको भी द्रवित कर देती। किस ब...
108 comments:
›
Home
View web version