न दैन्यं न पलायनम्

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24.9.14

कह जाने दो

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मन   में   दुख   का   भार   उठाये , अपने बिम्बों में सकुचाये, भीगी पलकों में आँखों की, मन के गहरे भाव छिपाये, कब तक अँसुअन को रोको...
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26.2.11

एक कंधा, सुबकने के लिये

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धरती को कैसा लगता होगा, जब कोई आँसू की बूँद उस पर गिरती होगी ? निश्चय मानिये, यदि आप सुन सकते तो उसकी कराह आपको भी द्रवित कर देती। किस ब...
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