कई बार ऐसा हुआ है ट्रेन यात्रा के समय रात में सोया और सुबह उठने पर पाया कि मोबाइल में १५% बैटरी कम हो गयी। कोई फ़ोन नहीं, कोई इण्टरनेट नहीं, तब कौन सा टैक्स लग गया? थोड़ा शोध किया तो पता चला कि यह नेटवर्क टैक्स है, आपका बिल नहीं खाता है, बस बैटरी खाता है।
कुछ दिनों बाद सामान्य ज्ञान के प्रश्न कुछ इस तरह से हुआ करेंगे। माना कि १००० किमी की यात्रा में २०० किमी में नेटवर्क नहीं है। पहले मार्ग में २०० किमी की यह दूरी २० किमी के १० हिस्सों में बंटी है। दूसरे मार्ग में २०० किमी की यह दूरी एक साथ है। किस मार्ग में जाने से आपकी बैटरी अधिक कम होगी और क्यों? उत्तर कठिन नहीं है, पहले मार्ग में बैटरी का क्षय दूसरे मार्ग से कहीं अधिक होगा।
क्यों का उत्तर भी समझाया जा सकता है, पर उसके लिये मोबाइल की सामान्य कार्यप्रणाली समझनी होगी। मोबाइल के अन्दर एक चिप होती है, जिसका कार्य बैटरी की ऊर्जा को रेडियो सिग्नल में बदलना होता है, रेडियो सिग्नल के माध्यम से हम नेटवर्क से संपर्क साध पाते हैं। यही चिप जिसे हम पॉवर एम्पलीफायर भी कहते हैं, मोबाइल की ६५% तक ऊर्जा खा जाती है। यदि नेटवर्क से संपर्क बना रहता है तो थोड़ी कम ऊर्जा लगती है, यदि नेटवर्क ढूँढना हो तो यही ऊर्जा और अधिक व्यय हो जाती है। यही नहीं, नेटवर्क न मिलने की दशा में पुनः खोज प्रारम्भ हो जाती है और तब तक चलती है जब तक वह मिल न जाये। कई अच्छी तकनीक वाले फ़ोन इस नेटवर्क बाधा से परिचित होते हैं और लगभग ३० मिनट बाद प्रयास करना बन्द कर देते हैं और अगले प्रयास के पहले थोड़ा विश्राम ले लेते हैं। कम समझदार मोबाइल जूझे रहते हैं और बैटरी गँवा कर गर्म होते रहते हैं।
२०० किमी में जब १० बार यह नेटवर्क बाधा आयेगी तो अधिक ऊर्जा व्यय होगी, जबकि केवल एक बार बाधा आने से यही व्यय बहुत कम होगा। ऐसा नहीं है कि नेटवर्क का न होना ही ऊर्जा व्यय करता है। जब भी नेटवर्क की उपस्थिति कम होती है या कहें कि आपको अपने मोबाइल में कम डंडियाँ दिख रही हों, समझ लीजिये कि चिप महोदय बैटरी का ख़ून चूसने में लगे हैं, नेटवर्क से अपना संबंध स्थापित करने के लिये और आपको अधिक डंडियाँ दिखाने के लिये। अधिक सघनता या टॉवर से दूरी के कारण नेटवर्क की क्षमता में आये उतार चढ़ाव आपकी मोबाइल बैटरी को बहुत अधिक प्रभावित करते हैं। संभव है कि दो कम्पनियों के नेटवर्क एक ही तरह के मोबाइल पर भिन्न प्रभाव डालें। एक नगर में भी किसी कम्पनी के टॉवरों को इस तरह से लगाया जाता है कि कम से कम टॉवरों में सारा नगर ढक जाये और बाधित नेटवर्क के स्थान भी न्यूनतम रहें। यदि उसमें कोई कमी रही है तो उसका दण्ड आपकी मोबाइल बैटरी को देना होगा, नेटवर्क टैक्स के रूप में।
फोन का यह नियत टैक्स तो सबको ही देना पड़ेगा। अब जो लोग फ़ेसबुक, ट्विटर आदि के लिये इण्टरनेट का भी उपयोग करते हैं, उनकी बैटरी लगभग दुगनी गति से कम होती है। कुछ और लोग जो बड़े नगरों में हैं और साधारण जीएसएम के स्थान पर २जी या ३जी का उपयोग करते हैं, उनका कार्य और भी तीव्र गति से हो जाता है। उन्हें अधिक डाटा डाउनलोड करने की सुविधा रहती है पर उनकी बैटरी और भी अधिक मात्रा में कम हो जाती है। सिद्धान्त वही है कि जितना तेज भागना हो उतनी तेजी से ऊर्जा बहानी पड़ती है।
आप यदि अतिव्यस्त हैं तो चाहेंगे कि जैसे ही कोई ईमेल हो या फेसबुक स्टेटस आया हो, वह तुरन्त ही आपके मोबाइल पर उपस्थित हो जाये। इस दशा में आप अपना २जी या ३जी नेटवर्क हर समय चालू रखते हैं और आपका संबंधित एप्लीकेशन सदा ही यह पता करने में लगा रहता है कि कोई आगत संदेश तो नहीं है। इस स्थिति में बैटरी अत्यन्त दयनीय हो जाती है, पता नहीं कब समाप्त हो जाये, कभी कभी तो एक दिन भी नहीं। प्रारम्भिक फोनों में एक नोकिया का फोन ऐसा था जो डाटा केवल एप्लीकेशन खोलने पर ही जोड़ता था और शेष समय बन्द रखता था। सारे फोनों में यह सुविधा नहीं है और बहुधा डाटा बहता ही रहता है, न जाने कितने स्रोतों से। एक नये शोध में यह भी बताया गया है कि फ्री में मिलने वाले एप्लीकेशन सर्वाधिक डाटा खाते हैं क्योंकि उसमें आपके मोबाइल से संबंधित जानकारी अपलोड होने की और विविध प्रचार डाउनलोड होने की विवशता होती है। हो सके तो वह अनुप्रयोग खरीद ले, उसमें प्रचार नहीं होगा और वह डाटा और बैटरी पर होने वाले धन के व्यय को भी बचायेगा।
एक बड़ा सीधा सा प्रश्न आ सकता है कि जब इतने पैसे खर्च कर एक स्मार्टफोन लिया है तो क्यों न उसका उपयोग अधिकतम करें। और यदि संसार से हर समय जुड़े रहना है तो इण्टरनेट को सदा ही चालू रखना होगा, थोड़ी बहुत बैटरी जाती है तो जाये। प्रश्न अच्छा है पर यह एक और बड़ा प्रश्न खड़ा करता है, क्या आप चाहते हैं कि आपका मोबाइल हर समय आपकी दिनचर्या या कार्यचर्या में व्यवधान डालता रहे, या आपके अनुसार चले? यदि आप हर समय व्यवधान नहीं चाहते हैं तो दोनों ही ध्येय साधे जा सकते हैं, पहला सदा ही सूचित बने रहने का, दूसरा लम्बी बैटरी समय का। पर उसके लिये एक नियम बनाना पड़ेगा।
अपना डाटा 'पुस' के स्थान पर 'फेच' पर कर लें, कहने का आशय है कि जब भी आप अपना एप्लीकेशन खोलेंगे तभी डाटा बहना प्रारम्भ होगा। हो सकता है यह करने के पश्चात आप दिन में कई बार देखें, पर बीच का जो समय बचेगा उस समय आपका मोबाइल व्यर्थ श्रम करने से बच जायेगा और बैटरी अधिक चलेगी। ऐसा करने भर से बैटरी में २०% तक ही वृद्धि हो जायेगी, न कुछ छूटेगा और व्यवधान भी कम होगा। यदि बैटरी और बचानी हो तो डाटा को पूरी तरह से बन्द कर दें और जब भी एप्लीकेशन देखना हो उसके पहले ही डाटा भी जोड़ें। जब एप्लीकेशन नहीं भी चल रहा होता है तब भी २जी या ३जी को स्थापित किये रहने में बहुत बैटरी खर्च होती है। साथ ही साथ ३जी नेटवर्क पर किया फोन और एसएमएस भी सामान्य की तुलना में कहीं अधिक ऊर्जा खाते हैं। डाटा भी बन्द कर देने से बैटरी का समय लगभग दुगना हो गया। ऐसा नहीं कि कोई कार्य छूट गया हो, बस थोड़ा सा व्यवस्थित भर हो गया। दो या तीन घंटे में समय पाकर एक बार डाटा चालू कर सारे स्टेटस और ईमेल देख लेते थे और फिर अपने कार्य में। थोड़ा धैर्य भर बढ़ गया, सूचना पूरी मिलती रही।
एक बात और, मोबाइल में वाईफाई के माध्यम से इण्टरनेट देखने में नेटवर्क की तुलना में बहुत कम ऊर्जा व्यय होती है और गति अधिक मिलती है सो अलग। यदि आपके पास घर या कार्यालय में वाईफाई की सुविधा है तो उसका उपयोग अवश्य करें। वाईफाई होने पर उसी को नेटवर्क के ऊपर प्राथमिकता मिलती है। यह प्रयोग आईफोन पर किया और पहले की तुलना में लगभग दुगनी बैटरी चलने लगी। पहले एक दिन चलती थी, अब दो दिन से भी अधिक खिंच गयी। हमने नेटवर्क से यथासंभव कम संपर्क रखा हुआ है, केवल कार्यानुसार ३जी चलता है, बैटरी के रूप में हमारा नेटवर्क टैक्स भी कम हो गया है। आप भी प्रयोग कर डालिये।
कुछ दिनों बाद सामान्य ज्ञान के प्रश्न कुछ इस तरह से हुआ करेंगे। माना कि १००० किमी की यात्रा में २०० किमी में नेटवर्क नहीं है। पहले मार्ग में २०० किमी की यह दूरी २० किमी के १० हिस्सों में बंटी है। दूसरे मार्ग में २०० किमी की यह दूरी एक साथ है। किस मार्ग में जाने से आपकी बैटरी अधिक कम होगी और क्यों? उत्तर कठिन नहीं है, पहले मार्ग में बैटरी का क्षय दूसरे मार्ग से कहीं अधिक होगा।
२०० किमी में जब १० बार यह नेटवर्क बाधा आयेगी तो अधिक ऊर्जा व्यय होगी, जबकि केवल एक बार बाधा आने से यही व्यय बहुत कम होगा। ऐसा नहीं है कि नेटवर्क का न होना ही ऊर्जा व्यय करता है। जब भी नेटवर्क की उपस्थिति कम होती है या कहें कि आपको अपने मोबाइल में कम डंडियाँ दिख रही हों, समझ लीजिये कि चिप महोदय बैटरी का ख़ून चूसने में लगे हैं, नेटवर्क से अपना संबंध स्थापित करने के लिये और आपको अधिक डंडियाँ दिखाने के लिये। अधिक सघनता या टॉवर से दूरी के कारण नेटवर्क की क्षमता में आये उतार चढ़ाव आपकी मोबाइल बैटरी को बहुत अधिक प्रभावित करते हैं। संभव है कि दो कम्पनियों के नेटवर्क एक ही तरह के मोबाइल पर भिन्न प्रभाव डालें। एक नगर में भी किसी कम्पनी के टॉवरों को इस तरह से लगाया जाता है कि कम से कम टॉवरों में सारा नगर ढक जाये और बाधित नेटवर्क के स्थान भी न्यूनतम रहें। यदि उसमें कोई कमी रही है तो उसका दण्ड आपकी मोबाइल बैटरी को देना होगा, नेटवर्क टैक्स के रूप में।
फोन का यह नियत टैक्स तो सबको ही देना पड़ेगा। अब जो लोग फ़ेसबुक, ट्विटर आदि के लिये इण्टरनेट का भी उपयोग करते हैं, उनकी बैटरी लगभग दुगनी गति से कम होती है। कुछ और लोग जो बड़े नगरों में हैं और साधारण जीएसएम के स्थान पर २जी या ३जी का उपयोग करते हैं, उनका कार्य और भी तीव्र गति से हो जाता है। उन्हें अधिक डाटा डाउनलोड करने की सुविधा रहती है पर उनकी बैटरी और भी अधिक मात्रा में कम हो जाती है। सिद्धान्त वही है कि जितना तेज भागना हो उतनी तेजी से ऊर्जा बहानी पड़ती है।
आप यदि अतिव्यस्त हैं तो चाहेंगे कि जैसे ही कोई ईमेल हो या फेसबुक स्टेटस आया हो, वह तुरन्त ही आपके मोबाइल पर उपस्थित हो जाये। इस दशा में आप अपना २जी या ३जी नेटवर्क हर समय चालू रखते हैं और आपका संबंधित एप्लीकेशन सदा ही यह पता करने में लगा रहता है कि कोई आगत संदेश तो नहीं है। इस स्थिति में बैटरी अत्यन्त दयनीय हो जाती है, पता नहीं कब समाप्त हो जाये, कभी कभी तो एक दिन भी नहीं। प्रारम्भिक फोनों में एक नोकिया का फोन ऐसा था जो डाटा केवल एप्लीकेशन खोलने पर ही जोड़ता था और शेष समय बन्द रखता था। सारे फोनों में यह सुविधा नहीं है और बहुधा डाटा बहता ही रहता है, न जाने कितने स्रोतों से। एक नये शोध में यह भी बताया गया है कि फ्री में मिलने वाले एप्लीकेशन सर्वाधिक डाटा खाते हैं क्योंकि उसमें आपके मोबाइल से संबंधित जानकारी अपलोड होने की और विविध प्रचार डाउनलोड होने की विवशता होती है। हो सके तो वह अनुप्रयोग खरीद ले, उसमें प्रचार नहीं होगा और वह डाटा और बैटरी पर होने वाले धन के व्यय को भी बचायेगा।
एक बड़ा सीधा सा प्रश्न आ सकता है कि जब इतने पैसे खर्च कर एक स्मार्टफोन लिया है तो क्यों न उसका उपयोग अधिकतम करें। और यदि संसार से हर समय जुड़े रहना है तो इण्टरनेट को सदा ही चालू रखना होगा, थोड़ी बहुत बैटरी जाती है तो जाये। प्रश्न अच्छा है पर यह एक और बड़ा प्रश्न खड़ा करता है, क्या आप चाहते हैं कि आपका मोबाइल हर समय आपकी दिनचर्या या कार्यचर्या में व्यवधान डालता रहे, या आपके अनुसार चले? यदि आप हर समय व्यवधान नहीं चाहते हैं तो दोनों ही ध्येय साधे जा सकते हैं, पहला सदा ही सूचित बने रहने का, दूसरा लम्बी बैटरी समय का। पर उसके लिये एक नियम बनाना पड़ेगा।
अपना डाटा 'पुस' के स्थान पर 'फेच' पर कर लें, कहने का आशय है कि जब भी आप अपना एप्लीकेशन खोलेंगे तभी डाटा बहना प्रारम्भ होगा। हो सकता है यह करने के पश्चात आप दिन में कई बार देखें, पर बीच का जो समय बचेगा उस समय आपका मोबाइल व्यर्थ श्रम करने से बच जायेगा और बैटरी अधिक चलेगी। ऐसा करने भर से बैटरी में २०% तक ही वृद्धि हो जायेगी, न कुछ छूटेगा और व्यवधान भी कम होगा। यदि बैटरी और बचानी हो तो डाटा को पूरी तरह से बन्द कर दें और जब भी एप्लीकेशन देखना हो उसके पहले ही डाटा भी जोड़ें। जब एप्लीकेशन नहीं भी चल रहा होता है तब भी २जी या ३जी को स्थापित किये रहने में बहुत बैटरी खर्च होती है। साथ ही साथ ३जी नेटवर्क पर किया फोन और एसएमएस भी सामान्य की तुलना में कहीं अधिक ऊर्जा खाते हैं। डाटा भी बन्द कर देने से बैटरी का समय लगभग दुगना हो गया। ऐसा नहीं कि कोई कार्य छूट गया हो, बस थोड़ा सा व्यवस्थित भर हो गया। दो या तीन घंटे में समय पाकर एक बार डाटा चालू कर सारे स्टेटस और ईमेल देख लेते थे और फिर अपने कार्य में। थोड़ा धैर्य भर बढ़ गया, सूचना पूरी मिलती रही।
एक बात और, मोबाइल में वाईफाई के माध्यम से इण्टरनेट देखने में नेटवर्क की तुलना में बहुत कम ऊर्जा व्यय होती है और गति अधिक मिलती है सो अलग। यदि आपके पास घर या कार्यालय में वाईफाई की सुविधा है तो उसका उपयोग अवश्य करें। वाईफाई होने पर उसी को नेटवर्क के ऊपर प्राथमिकता मिलती है। यह प्रयोग आईफोन पर किया और पहले की तुलना में लगभग दुगनी बैटरी चलने लगी। पहले एक दिन चलती थी, अब दो दिन से भी अधिक खिंच गयी। हमने नेटवर्क से यथासंभव कम संपर्क रखा हुआ है, केवल कार्यानुसार ३जी चलता है, बैटरी के रूप में हमारा नेटवर्क टैक्स भी कम हो गया है। आप भी प्रयोग कर डालिये।