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18.9.13

एप्पल - एक और दिशा निर्धारण

नया स्वरूप
जैसा कि पुरानी पोस्ट में संभावना व्यक्त की थी, एप्पल ने आईफ़ोन के दो मॉडल उतारे, पॉलीकार्बोनेट काया का आईफ़ोन 5सी व धातुकाया का आईफ़ोन 5एस। बहुत अच्छा किया कि इन दोनों में ही उसने अपने मुख्य मानक नहीं बदले, चार इंच की स्क्रीन रखी, ११२ ग्राम का भार और ३२६ पीपीआई की स्क्रीन स्पष्टता भी। बड़ी स्क्रीन व बढ़ी स्पष्टता के लिये बड़ा कोलाहल था, पर ये दोनों बैटरी निचोड़ने में अधिक और उपयोगिता में कम सिद्ध होने वाले थे, अतः इन्हें न बदल कर एप्पल ने अपना सशक्त पक्ष बनाये रखा है। जैसा सोचा था, बैटरी की क्षमता बिना भार बढ़ाये लगभग १० प्रतिशत बढ़ी है, पर उसकी तुलना में उससे बैटरी का समय नहीं बढ़ा है। यह अतिरिक्त बैटरी क्षमता, मोबाइल का समय न बढ़ा कर कहीं और सार्थक उपयोग में लायी गयी है, आइये उसके महत्व को समझते हैं।

एप्पल ने मुख्यतः तीन क्षेत्रों में बदलाव किये हैं। प्रोसेसर, कैमरा और सुरक्षा। अपनी छवि और नेतृत्व के अनुसार ये तीनों तकनीकी बदलाव मोबाइल क्षेत्र में सर्वप्रथम हैं, शेष अन्य मोबाइल बनाने वालों के लिये अनुकरणीय। अभी केवल आईफ़ोन से संबद्ध घोषणायें हुयी हैं पर इसके तन्तु आने वाले अन्य उत्पादों में भी झंकृत होते रहेंगे।

जो प्रोसेसर नये आईफोनों में आयेगा, वह ए७(A7) होगा। एक बात बताते चलें कि प्रोसेसर मोबाइल या कम्प्यूटर की आत्मा होता है और जो भी गणनायें या कार्य होते हैं, वह प्रोसेसर के माध्यम से ही होते हैं। यह जानना भी रोचक है कि जो भी प्रोसेसर होते हैं उन्हें एप्पल स्वयं ही डिजायन करता है और इस तरह से करता है कि हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर में समन्वय सम्पूर्ण रहे। इसकी विशेषता यह है कि यह ६४ बिट है। ६४ बिट तनिक तकनीकी शब्द है और जब मैंने अपना लैपटॉप को पुनः प्रतिष्ठित किया था, इस शब्द को समझाया था। आपको असुविधा न हो अतः पुनः इसे समझा देता हूँ।

हर प्रोसेसर में एक मेमोरी होती है जो सामान्य मेमोरी से भिन्न होती है। इस मेमोरी को रैम(RAM) कहते हैं। इसका प्रयोग भिन्न प्रोग्रामों को चलाने के लिये एक अस्थायी क्षेत्र की तरह से किया जाता है। जब कोई प्रोग्राम चलता है तो अपने को सुचारु रूप से चलाने के लिये वह रैम से ही मेमोरी छेंक लेता है। जब एक साथ कई प्रोग्राम चलते हैं तो सबके हिस्से की सम्मिलित मेमोरी कुल रैम से अधिक नहीं होनी चाहिये। यदि ऐसा होता है तो प्रोग्रामों के बीच होड़ मचेगी। तब या तो कुछ प्रोग्राम नहीं चलेगें, या चलेंगे तो धीरे चलेंगे। सरल प्रोग्राम कम रैम लेते हैं, वीडियो गेम जैसे प्रोग्राम या गणना प्रधान प्रोग्राम कहीं अधिक मेमोरी लेते हैं।

कितना कुछ है मुझमें
३२ बिट के प्रोसेसरों की रैम २ की ३२ घातों तक होती है और ४जीबी के पार नहीं जा पाती है। ६४ बिट के प्रोसेसरों में रैम १६ ईबी तक बढ़ाई जा सकती है। कहने का आशय यह कि प्रोग्रामों के लिये कई गुना अधिक मेमोरी उपस्थित रहेगी। इस बढ़ी हुयी मेमोरी का लाभ और अधिक उन्नत प्रोग्राम बनाने के लिये किया जा सकता है और वही एप्पल का उद्देश्य भी है। ६४ बिट के प्रोसेसर मुख्यतः लैपटॉप में लगाये जाते हैं, मोबाइलों में इसका प्रयोग प्रारम्भ कर एप्पल मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप के बीच के अन्तर की मिटाने पर उद्धत है। अपनी स्क्रीन के आकार के कारण मोबाइल भले ही लैपटॉप का स्थान न ले पाये, पर टैबलेट निश्चय ही लैपटॉप की समाप्ति के अन्तिम गीत गाने लगेंगे।

मोबाइल और टैबलेट में ६४ बिट का प्रोसेसर लाकर एप्पल ने पहल कर अपना आशय स्पष्ट कर दिया है, प्रतियोगियों के पास अब और कोई विकल्प नहीं है, सिवाय इसके कि वे भी अनुसरण करें। चित्रों और ग्रॉफिक्स के लिये भी एप्पल उच्चतम वर्तमान मानक लेकर आया है। यही नहीं ए७ के साथ में एक और उपप्रोसेसर एम७ भी होगा, जो मोबाइल से मापी जा सकने वाली शरीर की गतियों की गणना करेगा और वह भी मुख्य प्रोसेसर की ऊर्जा व्यर्थ किये बिना। यह उपप्रोसेसर स्वास्थ्य, चिकित्सा मनोरंजन आदि के क्षेत्रों में बनाये जाने वाले प्रोग्रामों के लिये आधारभूत संरचना तैयार करेगा। निश्चय ही यह मानवता के लिये अत्यन्त लाभदायक रहेग और इस क्षेत्र में सृजनात्मकता के वृहद विस्तार खोलेगा।

६४ बिट ए७ प्रोसेसर का एक व्यवसायिक कारण भी है। अभी तक एप्पल अपने मैक कम्प्यूटरों पर इन्टेल प्रोसेसर उपयोग में ला रहा है। इस विकास के बाद आने वाले मैकबुक एयर में यदि ए७ प्रोसेसर आ जाये तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। जहाँ एक ओर इन्टेल प्रोसेसर अधिक बैटरी खाता है, वरन आकार में बड़ा भी है। साथ ही साथ बाह्य निर्भरता के कारण मैकबुक के हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर पक्ष में अधिक समन्वय की संभावना नहीं मिल पायी है। भविष्य के संकेत माने तो आने वाले समय में मैकबुक का आकार घटेगा, मूल्य कम होगा, भार कम होगा, सॉफ़्टवेयर अधिक उत्पादक होंगे और सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि बैटरी का समय २४ घंटे तक हो सकता है। इसे लेकर न केवल एप्पल उत्साहित है वरन तकनीकविदों में भी सुखद भविष्य की आशा का संचार है।

एप्पल ने आईओएस६ (iOS6) से ही लैपटॉप व मोबाइल के ओएस की दूरियाँ कम करना प्रारम्भ कर दिया था। आईओएस७ से यह कार्य और आगे बढ़ने वाला है जिससे लैपटॉप व मोबाइल में किये गये कार्य में कोई भिन्नता न हो और उपयोगकर्ता का अनुभव एक सा ही रहे।

यद्यपि कैमरे का मेगापिक्सल ८ ही रखा गया गया है, पर चित्रों की गुणवत्ता के क्षेत्र में तीन प्रमुख उन्नत विकास किये गये हैं। पहला लेन्स का आकार बढ़ाया गया है जिससे दृश्यों से सेन्सरों पर अधिक प्रकाश पहुँचे और चित्रों की गुणवत्ता बढ़े। दूसरा सेन्सरों का आकार लगभग २० प्रतिशत बढ़ा दिया है जिससे वे अधिक फोटॉन्स ग्रहण कर सके और स्पष्ट चित्र बन सकें। तीसरा फ़्लैश के प्रकाश का रंग वातावरण के रंग जैसा हो जाये जिससे दृश्यों की यथार्थता चित्रों में आये, न कि कोई तीसरा और भिन्न रंग। इसके अतिरिक्त सामर्थ्यशाली प्रोसेसर का लाभ उठाते हुये, एक साथ कई चित्र, उनका त्वरित संपादन और उन्नत निष्कर्ष, जिससे आप एक सिद्धहस्त फ़ोटोग्राफ़र की तरह चित्र खींच सकें।

सुरक्षा के क्षेत्र में फ़िंगरप्रिंट को मोबाइल खोलने व धनविनिमय का माध्यम बना देने से मोबाइल पहले से कहीं सुरक्षित हो चले हैं। अब कोई आपका मोबाइल नहीं चुरा पायेगा क्योंकि किसी चोर के लिये वह मोबाइल कभी खुलेगा ही नहीं। फ़िंगरप्रिंट से संबंधित तथ्य कहीं और न संरक्षित रह कर प्रोसेसर के अन्दर संरक्षित रहेंगे। इससे मोबाइल सुरक्षा की दीवार और भी ऊँची हो जायेगी और मोबाइल चोरी होना एक पुरानी कहानी सा हो जायेगा।

अपनी छवि के अनुसार एप्पल ने तकनीक के तीन अध्याय खोल दिये हैं। इस बार भी उपयोगकर्ताओं के सतही माँगों के बाजार को नकारते हुये, तकनीक पर स्वयं को केन्द्रित रखा है। १० सितम्बर को हुयी घोषणायें आने वाले कई वर्षों की दिशा निर्धारण की क्षमता रखती हैं, पूरे मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप के क्षेत्र के लिये।

7.9.13

अगला एप्पल कैसा हो

जब कभी भी एप्पल का नया उत्पाद आने वाला होता है, अपेक्षाओं की एक लम्बी सूची बन जाती है। हो भी क्यों न, किसी भी क्षेत्र में नायकों से यह आशा अवश्य रहती है कि तकनीक के अग्रतम शोधों के निष्कर्ष हमारे हाथों में होंगे। हर बार बात घूम फिर के तीन चार मानकों पर ठहर जाती है। उन्हीं के आधार पर बहसें होती हैं, बहसें क्या विधिवत युद्ध होते हैं, दो तीन मुख्य पाले रहते हैं। अब १० सितम्बर को निष्कर्ष चाहे जो निकले, पर उत्पाद आने के एक माह पहले से ज्ञानचक्षु इतने खुलने लगते हैं कि मन करता है कि एक शोधपत्र ही लिख डालें। शोधपत्र तो नहीं पर उन मानकों की चर्चा अवश्य होनी चाहिये, जो हम सबको समझ में आते हैं और हमारे उपयोग को प्रभावित भी करते हैं।

डेक्सटॉप, लैपटॉप, टैबलेट और मोबाइल, यही चार प्रमुख श्रेणियाँ हैं। डेक्सटॉप अब बीते समय की चीज़ होने वाली है और उसका उपयोग सीमित और विशिष्ट रह गया है। उसमें तकनीकी विकास तो हो रहा है पर वह चर्चा का विशेष बिन्दु नहीं। लैपटॉप में मैकबुक एयर ने पहले ही हल्केपन और बैटरी समय के सशक्त मानक स्थापित कर दिये है और शेष लैपटॉप निर्माता उसी का अनुसरण कर रहे हैं। दो साल पहले एक किलो का मैकबुक एयर लिया था, अभी तक उस मूल्य में उतना हल्का और उतनी अधिक बैटरी समय का कोई और लैपटॉप नहीं दिखा है।

संघर्ष केवल दो श्रेणियों में रह जाता है, टैबलेट और मोबाइल। अपेक्षाओं के बादल इन्हीं दो के ऊपर सर्वाधिक मँडराते हैं। आईपैड मिनी आने के बाद आईपैड पर उत्सुकता कम हो चली है। बहस आईपैड मिनी और आईफ़ोन के नये मॉडलों पर केन्द्रित हो चुकी है। तकनीक की श्रेष्ठता वैसे भी छोटे आकार में अधिक क्षमता भरने की होती है। इस पोस्ट में उन क्षमताओं और उनके तकनीकी पक्ष पर ही चर्चा सीमित रहेगी।

एप्पल के उत्पाद गुणवत्ता के साथ ही साथ अपने अधिक मूल्य के लिये भी जाने जाते हैं, लोग चाहकर भी उन्हें नहीं ख़रीद पाते हैं, यही उसकी आलोचना और प्रतियोगी उत्पादों की ओर मुड़ जाने का प्राथमिक आधार है। खोजीं पत्रकार बताते हैं कि एप्पल इस बार आईफ़ोन ५सी के नाम से नया मॉडल लाने वाला है जिसकी काया प्लास्टिक की होगी। एप्पल अपनी गुणवत्ता की छवि को कितना खोयेगा, क़ीमत कितनी कम करेगा और किन किन मानकों पर समझौता करेगा, इस बारे में ढेरों संभावनायें व्यक्त की जा रही हैं। आईफ़ोन इस क़दम से कितनी पहुँच बढ़ा पायेगा, यह १० सितम्बर को ही पता चलेगा, पर श्रेष्ठता के अन्य मानकों पर एप्पल अपने आप को कितना सिद्ध करता है यह उसकी विशिष्ट तकनीकी क्षमताओं को प्रदर्शित करेगा। पहले आईफ़ोन और फिर आईपैड मिनी का विश्लेषण करते हैं।

४ इंच की स्क्रीन, ११२ ग्राम भार, ३२६ पीपीआई की स्क्रीन स्पष्टता और लगभग ८ घंटे की बैटरी पर पहुँचने के बाद आईफ़ोन ५ के मॉडल में कुछ अधिक जोड़ पाने की संभावना नहीं दिखती है। प्रतियोगिता में सैमसंग का गैलैक्सी एस४ (५ इंच की स्क्रीन, १३० ग्राम भार, ४४१ पीपीआई और १६ घंटे की बैटरी) है और एचटीसी वन(४.७ इंच की स्क्रीन, १४३ ग्राम भार, ४६९ पीपीआई और १२ घंटे की बैटरी) है। जहाँ दोनो प्रतियोगी स्क्रीन की आकार, स्पष्टता और बैटरी में श्रेष्ठ हैं, वहीं उनका आकार और भार भी बढ़ा हुआ है। प्रश्न यह है कि एप्पल को अपने प्रतियोगियों की नक़ल करनी चाहिये या अपने मानक स्वयं नियत करने चाहिये, विशेषकर उन क्षेत्रों में जिसमें वह सशक्त है।

यदि स्क्रीन का आकार बड़ा होगा तो अधिक बैटरी खायेगी, यदि स्पष्टता अधिक होगी तब भी अधिक बैटरी का उपयोग होगा। अधिक बैटरी के लिये न केवल भार बढ़ेगा वरन आकार भी बढ़ेगा। यदि स्क्रीन का आकार और पीपीआई आवश्यकतानुसार निर्धारित कर दें तो मोबाइल का भार न्यूनतम किया जा सकता है। तीनों फ़ोन उठाकर देखे हैं, उपयोग की सहजता में आईफ़ोन५ का कोई प्रतियोगी नहीं। उसे एक हाथ से न केवल पकड़ सकते हैं वरन अँगूठे से टाइप भी कर सकते हैं। साथ ही वह पतला इतना है कि कहीं पर भी सरलता से समा जाता है।

मुझे नहीं लगता है कि एप्पल अपने प्रतियोगियों की नक़ल करने में अपने इस सशक्त पक्ष को खोना चाहेगी। स्क्रीन के आकार में ४ इंच के ऊपर जाने में कोई विशेष लाभ नहीं दिखता है, बड़े आकार के फ़ोन न केवल भद्दे लगते हैं वरन अनुभव में भी कुछ लाभ नहीं देते हैं। फ़ोन के प्राथमिक कार्यों के अतिरिक्त वेब के पेज बड़े देखने में, गेम खेलने में और वीडियो देखने में ही बड़ी स्क्रीन का उपयोग है। शेष सारे कार्य ४ इंच की स्क्रीन से भलीभाँति सम्पादित होते हैं। २८७ पीपीआई की स्पष्टता जिसे रेटिना डिस्प्ले भी कहते हैं, उसके ऊपर की स्पष्टता को आँख अन्तर नहीं कर पाती है। मुझे नहीं लगता है कि आईफ़ोन को वर्तमान ३२६ पीपीआई से ऊपर ले जाने का कोई भी प्रयास होगा।

अब शेष रहे भार और बैटरी, एप्पल अपनी तकनीकी शोधों और श्रेष्ठता का उपयोग या तो आईफ़ोन का भार कम करने में या बैटरी बढ़ाने में करेगा। वह जो भी करेगा और जितना करेगा, अपने प्रतियोगियों से उतनी बढ़त बना लेगा।

चार क्षेत्र हैं, जिनमें किये गये तकनीकी शोध एप्पल को लाभ पहुँचा सकते हैं। पहला है स्क्रीन की मोटाई और कम करना, दूसरा है नये तरह की बैटरी की तकनीक लेकर आना, तीसरा है प्रोसेसर और रेडियो एन्टेना की ऊर्जा की खपत कम करना और चौथा है सॉफ़्टवेयर को सरलीकृत कर व्यर्थ होने वाला समय और ऊर्जा बचाना। चारों का उपयोग कर भार कम किया जा सकता है और बैटरी का समय बढ़ाया जा सकता है। इन शोधों से न केवल आईफ़ोन लाभान्वित होगा वरन आईपैड मिनी भी अपने प्रतियोगियों से आगे निकलेगा।

आईपैड मिनी का प्रमुख प्रतियोगी नेक्सस७ है। ७.९ इंच की स्क्रीन, ३०८ ग्राम भार, १६५ पीपीआई और १२ घंटे की बैटरी पर आईपैड मिनी के पास अपनी स्क्रीन की स्पष्टता बढ़ाने का अवसर भी है। मुझे डर है कि कहीं पीपीआई बढ़ाने के व्यग्रता में एप्पल अपने तकनीकी लाभ न गँवा बैठे। बड़े आकार की स्क्रीनों में स्पष्टता अधिक महत्व नहीं रखती है और एप्पल को सारा तकनीकी लाभ इसी पर न्योछावर नहीं कर देना चाहिये। मैं पिछले आठ माह से आईपैडमिनी उपयोग में ला रहा हूँ, सारा कार्य इसी में करता हूँ, पर कभी ऐसा लगा नहीं कि इसमें स्पष्टता बढ़ाने की कोई आवश्यकता है। यहाँ पर भी एप्पल का प्रयास भार कम करने का और बैटरी समय बढ़ाने का होना चाहिये।

१० सितम्बर पर न केवल मेरी वरन एप्पल के प्रतियोगियों की पूर्ण दृष्टि रहेगी। जो भी निष्कर्ष हों, लाभ उपभोक्ता का होगा। मानकों की एक स्वस्थ प्रतियोगिता में, तकनीक का विकास ही होता है, नहीं तो किसने सोचा था कि अपने प्रथम कम्प्यूटर पूर्वज से लाख गुना छोटा और लाख गुना अधिक शक्तिशाली मोबाइल हमारी पीढ़ी को देखने को मिलेगा। आइये १० सितम्बर की प्रतीक्षा करते है।

19.9.12

एप्पल का मूल्य

अभी तक की सर्वाधिक मूल्यवान कम्पनी का स्थान पाने के बाद अपेक्षाओं का जो अंबार एकत्र होता है, उसे समेट कर व्यवस्थित रख पाना उस कम्पनी की अगली चुनौती बन जाती है। शीर्ष पर होने का धर्म उत्सवीय कम और चिन्तनशील अधिक होता है। ऊँचाई पर तनिक बैठ कर सुस्ता लेने में लुढ़क जाने का भय है, सबकी दृष्टि आप पर जो है, प्रतियोगिता गलाकाट जो है। नयी तकनीकों का विस्तार और उनके प्रयोगों का अधिकार, दोनों कार्य उस कम्पनी की क्षमता को सतत तौलते रहते हैं। यह केवल कम्पनियों पर ही लागू नहीं होता है वरन ऊँचाई पर पहुँचे व्यक्तियों, समाजों और सभ्यताओं पर भी सटीक बैठता है।

लगभग वर्ष भर पहले जब स्टीव जॉब्स का निधन हुआ था, उस समय एप्पल से मात्र प्रारम्भिक परिचय हुआ था। तब मैकबुक एयर माह भर पुराना था और आईफोन लिये जाने में दो माह शेष थे। स्टीव जाब्स के व्यक्तित्व ने प्रभावित किया था, बहुत कुछ इसलिये कि सफलता प्रभावित करती है, बहुत कुछ इसलिये भी कि तलहटी तक गिर कर शिखर को छूने वालों की विश्व उपासना करता है, उनका संघर्ष सबको अभिभूत करता है। स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय में दिये गये अभिभाषण ने उनके व्यक्तित्व के आधारभूत गुणों से सारे विश्व को अवगत कराया था। मृत्यु को देख कर वापस आने वाले जीवन अपना समय व्यर्थ नहीं करते है, पैन्क्रियाटिक कैंसर से बच कर निकले जो ६ वर्ष उन्होंने व्यतीत किये हैं, वे न केवल एप्पल के लिये मूल्यवान थे वरन विश्व की दिशा नियत करने में सक्षम भी। मेरे लिये इस धारणा के सत्यापन का आधार एप्पल उत्पादों का वर्ष भर किया हुआ उपयोग रहा, मैकबुक एयर और आईफोन का उपयोग रहा।

निश्चय ही एप्पल के उत्पाद मँहगे होते हैं, और उन्हें खरीदने के पहले आपको दो बार सोचना होता है। आर्थिक अवलोकन आवश्यक है पर यह भी सच है कि हम सबसे सस्ती चीज भी नहीं खरीदते हैं। आवश्यकता के अनुसार मापदण्ड निश्चित करने के बाद हम गुणवत्ता का ही आधार लेते हैं, अधिक गुणवत्ता के लिये अधिक धन खर्च करना स्वाभाविक भी है। संभवतः यही हुआ मैकबुक एयर की खरीद में, एक ऐसा लैपटॉप देख रहा था जो हल्का हो, बैटरी पर अधिक समय चलने वाला हो और संरचना में सुदृढ़ हो। इस विषय पर कई दिन अनुसंधान किया पर किसी और उत्पाद को इसके निकट नहीं पाया। वर्षों विण्डो पर कार्य करते बीते थे अतः नये परिवेश में ढलना प्रारम्भ में तनिक कठिन रहा, पर धीरे धीरे कार्य ने गति पकड़ ली। आईफोन का खरीदना और भी रोचक रहा, विण्डो मोबाइल ४ वर्ष का हो चुका था, नोकिया, एलजी और ब्लैकबेरी के हिन्दी टाइप करने वाले तीन और मोबाइल उपयोग में लाया पर संतुष्टि नहीं मिली। उसी समय आईफोन पर हिन्दी पूर्ण रूप में आयी थी, जबकि एण्ड्रॉयड आदि विकासशील स्थिति में थे। आईफोन थोड़ा प्रयोग कर देखा, बहुत अच्छा लगा, खरीद लिया। दोनों में ही धन थोड़ा अधिक लगा था, पर एक वर्ष के उपयोग में पायी संतुष्टि के आधार पर यह कह सकता हूँ कि दोनों ही निर्णय गर्व करने योग्य थे।

आधुनिक डिजिटल जीवन के तीन अंग होते हैं, कम्प्यूटर या लैपटॉप, मोबाइल, इण्टरनेट। अपने अपने क्षेत्रों में इन तीनों का अलग अलग उपयोग भी किया जा सकता है और समन्वय स्थापित करके भी। इनका प्रभावी उपयोग करने वाले जानते हैं कि इनका भी अपना पारितन्त्र है, एक अवयव दूसरे का प्रेरक और पूरक है। कहने को तो मोबाइल न जाने कितने कार्य कर सकता है,फिर भी सुविधा के लिये हमें लैपटॉप का उपयोग करना पड़ता है। इसी प्रकार लैपटॉप भी सारे कार्य करता है पर हर स्थान पर ले नहीं जाया जा सकता है। कई ऐसे कार्य हैं जो हम दोनों में ही करते हैं और कई बार ऐसा भी होता है कि दोनों ही उपस्थित नहीं होते हैं, उस समय इण्टरनेट के माध्यम से हम अपने कार्य तक पहुँचना चाहते हैं। सारी आधुनिक कम्पनियाँ लैपटॉप, मोबाइल और इण्टरनेट सेवाओं के इस पारितन्त्र को स्थापित करने में लगी हैं। ध्यान से देखें तो किसी भी कम्पनी के पास तीनों अवयव उपस्थित नहीं हैं, सिवाय एप्पल के। माइक्रोसाफ्ट के पास मोबाइल का निर्माण नहीं है, इण्टरनेट सेवायें भी कम हैं। गूगल के पास कम्प्यूटर नहीं है, इसी प्रकार किसी भी बड़ी कम्पनी को देखें तो कोई न कोई अवयव अनुपस्थित मिलेगा।

क्या सुदृढ़ पारितन्त्र स्थापित करने के लिये सारे अवयवों का एक कम्पनी के साथ होना आवश्यक है? क्या सॉफ्टवेयर बनाने वाले हार्डवेयर भी बनायें? जी हाँ, यदि एलन के की माने तो, उनके अनुसार यदि कोई अपने सॉफ्टवेयर के प्रति गम्भीर है तो उन्हें अपना हार्डवेयर स्वयं बनाना चाहिये। इस तर्क में बल है और इसे समझना सरल भी। जब हम कोई ऐसा उत्पाद बनाते हैं जिसमें सभी को संतुष्ट कर सकें या जिसमें सभी के लिये संभावनायें हो तो बहुधा एक आम सा उत्पाद बन कर सामने आता है। वह उत्पाद भारी होता है और उसमें कई अनावश्यक चीजें कम की जा सकती हैं। आन्तरिक समन्वय वाह्य समन्वय से कहीं अधिक प्रभावी होता है। एप्पल इन तीनों ही क्षेत्रों में सिद्धहस्त है, और उनके आपसी समन्वय में कोई घर्षण भी नहीं है। मैकबुक एयर, आईपैड, आईफोन, आईक्लाउड और आईट्यून्स आदि अपने क्षेत्रों के उत्कृष्टतम उत्पाद हैं। वर्ष भर के अनुभव में इन सबको ढंग से समझने का अवसर मिला और एप्पल के पारितन्त्र की गुणवत्ता और उत्कृष्टता पर कोई सन्देह नहीं रहा।

स्टीव जाब्स जेन से प्रभावित थे, जेन सरलता को महत्व देता है। सरलता हर क्षेत्र में, जीवन में भी, कार्यक्षेत्र में भी। अनावश्यक को तब तक तजते जाना, जब तक अस्तित्व में पूर्णता न छलकने लगे। पता नहीं क्यों पर मुझे एप्पल के हर उत्पाद जेन के डिजिटल प्रतिरूप लगते हैं। उत्पादों को आकार इतना छोटा कर पाना और इतने कम में इतना अधिक भर पाना तब तक संभव नहीं हो सकता जब तक अनावश्यक आयतन हटा न दिया गया हो। जब उनके आईपॉड डिजाइनर ने कहा कि उन्होने आईपॉड का न्यूनतम आकार पा लिया है, तो उन्होने आईपॉड को एक एक्वेरियम में डाला दिया और कहा कि जब तक बुलबुले निकलना बन्द न हो जाये तब तक उसका आकार कम करें। उत्पाद डिजाइन में भी दर्शन समाहित किया जा सकता है, यह एप्पल के उत्पादों में देखा जा सकता है। सरलता का यही स्वरूप आईफोन में मात्र एक होम बटन के रूप में भी देखा जा सकता है और मैकबुक एयर की एकल एल्युमुनियम बॉडी में भी। यही सरलता सॉफ्टवेयर और ऑपेरेटिंग तन्त्र में दिखायी पड़ती है, यही कारण है कि एप्पल की ऊर्जा खपत न्यूनतम है और उत्पाद बिना रिचार्ज किये लम्बे चलते हैं।

एप्पल का दूसरा सशक्त पक्ष है कि डिजाइन संबंधी किसी भी तत्व को मूल से देखना। एप्पल के उत्पादों में कुछ भी ऐसा नहीं है जिसे उन्नत बनाने का प्रयास न किया गया हो। चिप, बॉडी, बैटरी, स्क्रीन, कैमरा, स्पीकर, हर वस्तु में हर बार कुछ न कुछ नया किया है। इतने श्रम और शोध ने न केवल एप्पल के उत्पादों को शीर्षतम स्तर पर पहुँचा दिया वरन प्रतियोगियों को भी बाध्य किया कि वे भी सृजन की राह पर बढ़ें। यदि कहा जाये कि एप्पल लगातार इस व्यवसाय के मानक तय कर रही है तो अतिश्योक्ति नहीं होगा।

जब आप सर्वश्रेष्ठ करने की ठान लें तो आप के लिये यह पता करना आवश्यक नहीं कि ग्राहकों को क्या चाहिये। स्टीव जाब्स ने माँग जानने के लिये कभी कोई ग्राहक सर्वेक्षण नहीं कराया। अपनी ओर से सर्वश्रेष्ठ देकर सदा ही ग्राहकों को चकित करने की परम्परा रही है एप्पल में। ग्राहकों ने भी सदा ही उस गहन श्रम और शोध को सर आँखों पर बिठाया और अब स्थिति यह है कि लोग महीनों पहले से एप्पल के नये उत्पाद आने की प्रतीक्षा करते हैं।

एप्पल ने यहाँ तक निर्धारित किया कि उपयोगकर्ता के लिये सर्वश्रेष्ठ उपयोग-विधियाँ क्या हों। स्टाइलस के स्थान पर ऊँगली के उपयोग ने सारे अनुभव को सरल और त्वरित कर दिया। धीरे धीरे एप्पल की उपयोग-विधियाँ मानक हो गयीं और अभी भी वही दिशा बनी हुयी है।

मैकबुक एयर, आईफोन और आईक्लाउड के माध्यम से हमारा प्रशासनिक और साहित्यिक कार्य निर्बाध हो गया है। सरलता और सततता कार्यशैली के मूलमन्त्र बन गये हैं। समय का भरपूर उपयोग और उत्पादकता बढ़ाने में एप्पल ने एक महत योगदान दिया है। मेरे लिये तो एप्पल का मूल्य गहरा है और मापा नहीं जा सकता है, शोधपरक और श्रमशील एप्पल मेरे लिये सदा ही मूल्यवान बनी रहेगी।

19.10.11

आनन्द मनाओ हिन्दी री

पिछला एक माह परिवर्तन का माह रहा है मेरे लिये, स्वनिर्मित आवरणों से बाहर आकर कुछ नया स्वीकार करने का समय। स्थिरता की अकुलाहट परिवर्तन का संकेत है पर बिना चरम पर पहुँचे उस अकुलाहट में वह शक्ति नहीं होती जो परिवर्तन को स्थिर रख सके, अगली अकुलाहट तक। मन संतुष्ट नहीं रहता है, सदा ही परिवर्तनशील, सदा उसकी सुनेगे तो भटक जायेंगे, अकुलाहट तक तो रुकना होगा। विकल्प की उपस्थिति, उसकी आवश्यकता और उसे स्वयं में समाहित कर पाने की क्षमता परिवर्तन के संकेत हैं, यदि वे संकेत मिलने लगें तो आवरण हटा कर बाहर आया जा सकता है।

एक माह पहले मैक पर जाने के बाद से समय बड़ा गतिशील रहा है, पहले मेरे लिये, फिर एप्पल के लिये और अब हिन्दी के लिये। नये परिवेश को समझने के साथ साथ प्रशासनिक व साहित्यिक गतिशीलता बनाये रखना कहीं अधिक ऊर्जा माँगती है। आत्मीयों का प्रयाण, पहले हिमांशुजी, फिर स्टीव जॉब, मन को विचलित और दृष्टि को दार्शनिक रखने वाली घटनायें थीं। नये एप्पल आईफोन के साथ में आईओएस५ और आईक्लाउड का आगमन नयी संभावनाओं से पूर्ण था, पिछला सप्ताह उन संभावनाओं को खोजने और उस पर आधारित कार्यशैली की रूपरेखा बनाने में निकल गया।

ऐसा नहीं है कि एप्पल हर कार्य को सबसे पहले कर लेने हड़बड़ी में रहता हो, यद्यपि कई नयी तकनीकों व उत्पादों का श्रेय उसे जाता है। जिस बात के लिये उसे निश्चयात्मक श्रेय मिलना चाहिये, वह है उसकी अनुकरणीय गुणवत्ता और उत्पादों को सरलतम और गहनतम बना देने का विश्वास। मैकिन्टॉस, आईपॉड, आईफोन, आईपैड, मैकबुकएयर, सब के सब अपने क्षेत्रों के अनुकरणीय मानक हैं। आईओएस५ और आईक्लाउड के माध्यम से वही कार्य क्लॉउड कम्प्यूटिंग के क्षेत्र में भी किया गया है। आईओएस५ में अन्य तत्वों के अतिरिक्त आईक्लाउड ऐसा तत्व है जो क्लॉउड कम्प्यूटिंग के आगामी मानक तय करेगा।

क्लॉउड कम्प्यूटिंग अपनी सूचनाओं और प्रोग्रामों को इण्टरनेट पर रखने व वहीं से सम्पादित करने का नाम है। मूलतः दो लाभ हैं इसके, पहला तो आपकी सूचनायें सुरक्षित रहती हैं, इण्टरनेट पर जो कि आप कहीं से भी देख सकते हैं और साझा कर सकते हैं। दूसरा लाभ उन लोगों के लिये है जो मोबाइल और कम्प्यूटर, दोनों पर सहजता से कार्य करते हैं और उन्हें दोनों के ही बीच एक सततता की आवश्यकता होती है। कई स्थूल विधियाँ हैं, या तो आप याद रखें कि कहाँ पर क्या सहेजा है और उसे हर बार विभक्तता से प्रारम्भ करें, या आप अपना सारा कार्य बस इण्टरनेट पर ही निपटायें, या एक पेन ड्राइव के माध्यम से अपनी सूचनायें स्थानान्तरित करते रहें। उपरोक्त विधियाँ आपका कार्य तो कर देंगी पर अनावश्यक ऊर्जा भी निचोड़ लेंगी।

अब आईक्लाउड की सूक्ष्म प्रक्रिया देखिये, मैं अपने आईपॉड में एक अनुस्मारक लगाता हूँ, वाहन में, कार्यालय आते समय। कार्यालय आकर बैठकों में व्यस्त हो जाता हूँ, आकर लैपटॉप पर देखता हूँ, तो वही अनुस्मारक उपस्थित रहता है उसमें। सायं बैठकर बारिश में कविता की कुछ पंक्तियाँ लिखता हूँ लैपटॉप पर, अगली सुबह एयरपोर्ट जाते समय झमाझम होती बारिश में आधी पंक्तियों को पूरी करने की प्रेरणा मिलती है, आईपॉड पर स्वतः आ चुकी कविता पर लिखना प्रारम्भ कर देता हूँ। जितनी सूक्ष्मता से सततता बनी रहती है, उतनी ही विधि की गुणवत्ता होती है। प्रयोग कर के देखा, एक अनुस्मारक को मोबाइल से लैपटॉप पर पहुँचने में केवल १६ सेकण्ड लगे, अविश्वसनीय!

आईक्लाउड मेरे लिये संभवतः अर्धोपयोगी ही रहता यदि आईओएस५ में हिन्दी न आती। हिन्दी कीबोर्ड, अन्तर्निहित शब्दकोष और आईक्लाउड ने मेरी मैकबुक एयर और मेरे आईपॉड में न केवल प्रेरणात्मक ऊर्जा भर दी वरन उनको सृजनात्मकता से अन्तर्बद्ध कर दिया है। अब न कभी कोई विचार छूट पायेगा कहीं, कोई प्रयास न व्यर्थ जायेगा कहीं, बनी रहेगी उत्पादक सततता सभी अवयवों के बीच। आपने यदि अब तक अनुमान लगा लिया हो कि यह नया आईफोन खरीदने की बौद्धिक प्रस्तावना बनायी जा रही है, तो आप मेधा अब तक गतिशील है।

आईफोन की उमड़ती इच्छाओं के अब चाहें जो भी निष्कर्ष हों, पर हिन्दी लेखन के लिये निसन्देह एक उत्सवीय क्षण आया है, वह भी इतनी प्रतीक्षा के पश्चात, भरपूर प्रसन्न होने के लिये, मुदित हो मगन होने के लिये।

आनन्द मनाओ हिन्दी री..

17.9.11

अहा, लैपटॉप

पिछला एक माह उहापोह में बीता, कारण था नये लैपटॉप का चुनाव। पिछला लैपटॉप 5 वर्ष का होने को था और आधुनिक तकनीक में अपनी गति और भार की दृष्टि से मेरी यथा संभव सहायता कर रहा था। इतने दिन साथ घूमते घूमते थकान का अनुभव कर रहा था पर घर में शान्ति से बैठ सेवायें देने पर सहमत था। जिस यन्त्र पर हाथ सधा हुआ था, जिसके बारे में एक एक तथ्य ज्ञात था, जो मेरी सारी सूचनाओं को वर्षों को सहेजे हुये था, उसे छोड़ कुछ और अपनाना मेरे लिये कठिन था।

मेरे लिये कई निर्णय लेना आवश्यक था। 5 वर्ष पहले तक परिस्थितियाँ भिन्न थीं, लैपटॉप से अपेक्षायें भिन्न थीं, कई महत्वपूर्ण तत्व आकार ले रहे थे, तकनीकी क्षमतायें वर्तमान की आधी थीं, इण्टरनेट मोबाइल का प्रयोग विस्फोटित होने को तैयार बैठा था। उस समय जो मॉडल लिया था, वह अपने आप में सक्षम था, समयानुसार था, बाजार में अग्रणी था। उसकी पूर्ण क्षमताओं के उपयोग ने बहुत कुछ सिखाया है। जब भी जीवन को अधिक व्यवस्थित करने का समय आया या कम समय में अधिक निचोड़ने की आवश्यकता हुयी, लैपटॉप ने एक समर्थ सहयोगी की भूमिका निभायी है।

आधुनिक संदर्भों में लैपटॉप के चयन के लिये जिन बिन्दुओं पर निर्णय लेने थे उसे निर्धारित करने के लिये मुझे पिछले 5 वर्षों में हुये बदलाव को समझना आवश्यक हो गया। फैशन, सुन्दरता या आकार से प्रभावित होकर एक ऐसे लैपटॉप का चुनाव करना था जो आपके जीवन का अभिन्न अंग हो, आपकी कार्यशैली से सहज मेल खाता हो। अपनी रुचियों पर आधारित कार्यों को सरल और व्यवस्थित कर सकना, यही एकल उद्देश्य था चयन प्रक्रिया का। तीन महत्वपूर्ण बदलाव हुये, पहला ब्लॉग क्षेत्र में पदार्पण और नियमित लेखन, दूसरा कार्यक्षेत्र में गुरुतर दायित्व और निर्णय प्रक्रिया, तीसरा बच्चों के ज्ञानार्जन की तीव्रता में पिता का सहयोग। स्वाध्याय और जीवन का सरलीकरण पहले की ही तरह उपस्थित थे।

पहला था स्क्रीन का आकार, स्क्रीन का बड़ा होना अधिक बैटरी माँगता है, स्क्रीन का छोटा होना आँखों पर दबाव डालता है। बड़ी स्क्रीन में फिल्में देखने का सुख है तो छोटी स्क्रीन में लैपटॉप को कहीं भी ले जाने की सहजता। मध्यममार्ग अपनाकर 12-13 इंच की स्क्रीन निश्चित की गयी।

अगला निर्णय था, टैबलेट या नियमित कीबोर्ड। स्क्रीन पर वर्चुअल कीबोर्ड सदा ही एक विकल्प था पर अधिक टाईपिंग की स्थिति में स्क्रीन पर टाईप करना अनुपयुक्त और थका देने वाला था। आईपैड एचपी टचस्मार्ट की स्क्रीनों पर एक घंटे का समय बिताने के बाद नियमित कीबोर्ड अधिक सहज लगे। जहाँ अन्य टैबलेटों के ओएस कम क्षमता से युक्त थे वहीं विन्डोज के टैबलेट अपने नवजात स्वरूप में थे।

प्रॉसेसर की गति और क्षमता में आये परिवर्तन ने हम सबको अभिभूत किया है, संभवतः हमारी आवश्यकताओं से अधिक। भविष्य का ध्यान रखकर भी आई-5 और 4 जीबी रैम ही पर्याप्त लगा।

मेरी हार्ड डिस्क कभी भी 30 जीबी से अधिक भरी नहीं रही, कारण फिल्मों और गीतों के लिये 500 जीबी की वाह्य हार्ड डिस्क का होना। यदि कम हार्ड डिस्क में अच्छा लैपटॉप मिल सकता था तो उसका स्वागत था।

बैटरी का समय महत्वपूर्ण था, एक बार में कम से कम चार घंटे की बैटरी आवश्यक थी मेरे लिये। बड़ी बैटरी लैपटॉप का भार बढ़ाती हैं, छोटी बैटरी आपकी चिन्ता। 

इन सीमाओं में इण्टरनेट पर माह भर का शोध करने के पश्चात कई मॉल में जाकर उनका भौतिक अनुभव लिया।

पूरे घटनाक्रम में नाटकीय मोड़ तब आया जब एप्पल के शोरूम में नया मैकबुक एयर देखा। प्रेम विवाह नहीं किया अतः पहली दृष्टि  का प्रेम क्या होता था, ज्ञात नहीं था। इसे देखकर मन में जो भाव उमड़े उनका वर्णन कर पाना मेरे लिये संभव नहीं है, पर इतनी छोटी आकृति में उपरिलिखित क्षमतायें भर पाना एक चमत्कार से कम नहीं है। स्टीव जॉब को इस कार्य के लिये नमन।

यह मत पूछियेगा कि एप्पल के इस मँहगे मॉडल के लिये अतिरिक्त धन की पीड़ा आपसे कैसे सहन हुयी? श्रीमतीजी के वक्र नेत्रों की चिन्ता करते हुये मैं अपने नवोदित प्यार पर अतिरिक्त 15000 खर्च कर आया, प्यार किया तो डरना क्या? अब प्यार का पागलपन तो देखिये, 22 वर्षों के विण्डो के संचित ज्ञान को छोड़ मैं मैक ओएस सीखने बैठा हूँ, आशा है सारे नखरे सह लूँगा। 

आप बस एक चित्र देख लीजिये। आपको चेता रहा हूँ आपका मन डोल जाये तो दोष  दीजियेगा।