इसके पहले कि हम कहानी और विषय की चर्चा करें, चेतन भगत के बारे में जान लें, लेखकीय मनःस्थिति समझने के लिये। बिना जाने कहानी और विषय का आनन्द अधूरा रह जायेगा।
चेतन भगत का जीवन, यदि सही अर्थों में समझा जाये, वर्तमान शिक्षा व्यवस्था को समझने के लिये एक सशक्त उदाहरण है। अपने जीवन के साथ हुये अनुभवों को बहुत ही प्रभावी ढंग से व्यक्त भी किया है उन्होंने। फ़ाइव प्वाइण्ट समवन में आईआईटी का जीवन, नाइट एट कॉल सेन्टर में आधुनिक युवा का जीवन, थ्री मिस्टेक ऑफ़ माई लाइफ़ में तैयारी कर रहे विद्यार्थी का जीवन, टू स्टेट में आईआईएम का जीवन और इस पुस्तक में शिक्षा व्यवस्था का जीवन। हर पुस्तक में एक विशेष पक्ष पर प्रकाश डाला गया है, या संक्षेप में कहें कि शिक्षा व्यवस्था के आसपास ही घूम रही है उनकी उपन्यास यात्रा।
कहानी में तीन प्रमुख पात्र हैं, गोपाल, राघव और आरती। गोपाल गरीब है, बिना पढ़े और अच्छी नौकरी पाये अपनी गरीबी से उबरने का कोई मार्ग नहीं दिखता है उसे। अभावों से भरे बचपन में बिताया समय धन के प्रति कितना आकर्षण उत्पन्न कर देता है, उसके चरित्र से समझा जा सकता है। शिक्षा उस पर थोप दी जाती है, बलात। राघव मध्यम परिवार से है, पढ़ने में अच्छा है पर उसे जीवन में कुछ सार्थक कर गुजरने की चाह है। आईआईटी से उत्तीर्ण होने के बाद भी उसे पत्रकार का कार्य अच्छा लगता है, समाज के भ्रष्टाचार से लड़ने का कार्य। आरती धनाड्य परिवार से है, शिक्षा उसके लिये अपने बन्धनों से मुक्त होने का माध्यम भर है।
वाराणसी की पृष्ठभूमि है, तीनों की कहानी में प्रेमत्रिकोण, आरती कभी बौद्धिकता के प्रति तो कभी स्थायी जीवन के प्रति आकर्षित होती है। तीनों के जीवन में उतार चढ़ाव के बीच कहानी की रोचकता बनी रहती है। कहानी का अन्त बताकर आपकी उत्सुकता का अन्त कर देना मेरा उद्देश्य नहीं है पर चेतन भगत ने इस बात का पूरा ध्यान रखा है कि इस पुस्तक पर भी एक बहुत अच्छी फिल्म बनायी जा सकती है।
कहानी की गुदगुदी शान्त होने के बाद जो प्रश्न आपके सामने आकर खड़े हो जाते हैं, वे चेतन भगत के अपने प्रश्न हैं, वे हमारे और हमारे बच्चों के प्रश्न हैं, वे हमारी शिक्षा व्यवस्थता के अधूरे अस्तित्व के प्रश्न हैं।
प्रश्न सीधे और सरल से हैं, क्या शिक्षा हम सबके लिये एक सुरक्षित भविष्य की आधारशिला है या शिक्षा हम सबके लिये वह पाने का माध्यम है जो हमें सच में पाना चाहिये।
मैं आपको यह नहीं बताऊँगा कि मैं क्या चाहता था शिक्षा से और क्या हो गया? पर एक प्रश्न आप स्वयं से अवश्य पूछें कि आज आप अधिक विवश हैं या आपके द्वारा प्राप्त शिक्षा। चेतन भगत तो आज अपने मन के कार्य में आनन्दित हैं, सारी शिक्षा व्यवस्था को धता बताने के बाद।