न दैन्यं न पलायनम्

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1.2.15

ढाई आखर

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ढाई आखर, सबके लिये ही, अपने अलग अर्थ लिये। सबके लिये जीवन के एक पड़ाव पर, एक अनिवार्य अनुभव, एक स्पष्ट अनुभव। संभवतः उस समय तो नहीं, जिस स...
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23.2.11

बहता समीर

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अपने घर से निकलकर मित्र के घर पहुँचने तक की कार यात्रा में जीवन का दर्शन समेट कर रख दिया, सहयात्रियों को देखते, उनके बारे में बतियाते, उन...
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