न दैन्यं न पलायनम्
11.8.26
मैं भोग रहा या स्वयं भुक्त
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न कर्मबन्ध , न संस्कार , न चित्तवृत्ति , न क्लेश पार , उस ओर अकेले बैठ गया , मेरा परिचय ही निर्विकार। न विषय रमण , न झंकृत म...
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14.7.26
वह क्षण भर है, पर जीवन है
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गत क्षण मन जिस पर, लब्ध वही, आगत क्षण का प्रारब्ध वही, इस गत आगत के मध्य व्यक्त, वह क्षण भर है, पर जीवन है। स्मृति में छिटके भाव शेष, कल्...
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21.8.22
सज्जन-मन
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सब सहसा एकान्त लग रहा, ठहरा रुद्ध नितान्त लग रहा, बने हुये आकार ढह रहे, सिमटा सब कुछ शान्त लग रहा। मन का चिन्तन नहीं व्यग्रवत, शुष्क ...
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14.8.22
तेल और बाती
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मेरा जीवन , एक दिये सा , तेल तनिक पर बाती लम्बी , जलने की उत्कट अभिलाषा , स्रोत विरलतम , आस विहंगी। आशा के अनुरूप जल...
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