न दैन्यं न पलायनम्
14.7.26
वह क्षण भर है, पर जीवन है
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गत क्षण मन जिस पर, लब्ध वही, आगत क्षण का प्रारब्ध वही, इस गत आगत के मध्य व्यक्त, वह क्षण भर है, पर जीवन है। स्मृति में छिटके भाव शेष, कल्...
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21.8.22
सज्जन-मन
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सब सहसा एकान्त लग रहा, ठहरा रुद्ध नितान्त लग रहा, बने हुये आकार ढह रहे, सिमटा सब कुछ शान्त लग रहा। मन का चिन्तन नहीं व्यग्रवत, शुष्क ...
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14.8.22
तेल और बाती
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मेरा जीवन , एक दिये सा , तेल तनिक पर बाती लम्बी , जलने की उत्कट अभिलाषा , स्रोत विरलतम , आस विहंगी। आशा के अनुरूप जल...
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7.8.22
धर बल, अगले पल चल जीवन
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शत पग , रत पग , हत पग जीवन , धर बल , अगले पल चल जीवन। रथ रहे रुके , पथ रहे बद्ध , प्रारम्भ , अन्त से दूर मध्य , सब ...
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31.7.22
जहाँ से चले थे, वहीं पर खड़े हैं
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वही प्रश्न हैं और उत्तर वही हैं , नहीं ज्ञात यह भी , सही या नहीं हैं , समस्या भ्रमित , हर दिशा अग्रसर है , नहीं प्रश्न ...
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