न दैन्यं न पलायनम्
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घर
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21.12.13
रिक्त मनुज का शेष रहेगा
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यही दृश्य हमने देखा था हम कार्यालय से उतरे थे, दिन के कार्य दिवंगत कर के, देखा सम्मुख उतरे आते, मित्र हमें जो मन से भाते, पीछे...
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31.10.12
एक बड़ा था पेड़ नीम का
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बचपन की सुन्दर सुबहों का भीना झोंका, आँख खुली, झिलमिल किरणों को छत से देखा, छन छन कर जब पवन बहे, तन मन को छूती, शुद्ध, स्वच्छ, मधुरिम ब...
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18.2.12
मटर की फलियाँ
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सप्ताहन्त का एक दिन नियत रहता है, सब्जी, फल और राशन की खरीददारी के लिये, यदि संभव हो सके तो शनिवार की सुबह। जब आईटी शहर के नागरिक शुक्रव...
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29.10.11
दीवाली और घर की सफाई
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दीवाली के पहले की एक परम्परा होती है, घर की साफ़ सफाई। घर में जितना भी पुराना सामान होता है, वह या तो बाँट दिया जाता है या फेंक दिया जाता ...
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12.3.11
डरे डरे से मोरे सैंया
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जब मन में छिपा हुआ सत्य अप्रत्याशित रूप से सामने आ जाता है , तब न कुछ बोलते बनता है और न कहीं देखते बनता है। बस अपनी चोरी पर मुस्करा कर...
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