न दैन्यं न पलायनम्
Showing posts with label
ऋण
.
Show all posts
Showing posts with label
ऋण
.
Show all posts
8.11.14
जाने कितने ऋण बाकी हैं
›
मुश्किल है ढोना कृतघ्नता , चुभते अब समझौते भी हैं । अर्पण जो तुझको करने हैं, जाने कितने ऋण बाकी हैं ।। रमकर तेरे उपकरणों म...
9 comments:
›
Home
View web version