न दैन्यं न पलायनम्

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8.11.14

जाने कितने ऋण बाकी हैं

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मुश्किल   है   ढोना   कृतघ्नता , चुभते अब समझौते भी हैं । अर्पण जो तुझको करने हैं, जाने कितने ऋण बाकी हैं ।। रमकर तेरे उपकरणों म...
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