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20.9.15

जीना ही होगा

तुझे जीना ही होगा

अनुकूल बात, हो न हो,
कार्यान्त रात, हो न हो,
न्यूनतम व्याप्त, विषयगत आस , हो न हो।

हृदय-तम अब हटाना है,
उन्हें यह सच बताना है,
नहीं उनसे विश्व पालित,
यहाँ सबका ठिकाना है।

नहीं अमृत का कलश है,
प्राप्ति में श्वेदान्त रस है,
उपेक्षा का अर्क, पीना ही होगा,
तुझे जीना ही होगा।

5.7.14

आँखों के आँसू


विधि के हाथ रचे जीवन काभार उठाये हाथों में,
आहों का उच्छ्वास रोककरफूलीउखड़ी साँसों में 
कष्ट हृदय-बल तोड़ रहारह शान्त वेदना सहते हैं,
आँखों से पर बह आँसू दोकई और कहानी कहते हैं ।।१।।

है बाढ़मड़ैया डूब रहीपुनिया शंकितचुपचाप खड़ी,
बहता जाता जल वेगवानकंपित मनस्थिर हुये प्राण 
भर आयीं पर आँखें रो रोयाद रहाबस हुये वर्ष दो,
था निगल गया एक चक्रवातमेरे नन्हे से कान्हू को ।।२।।

गंगू के खेतों में सूखाआस वाष्पितजीवन रूखा,
क्षुब्ध हृदयविधि का प्रहारदेखे नभकोसे बार बार 
तब जल आँखों में आयेगाऔर प्रश्न यही कर जायेगा,
कैसे साहू का कर्ज पटाबेटी का ब्याह रचायेगा ।।३।।

पुत्र शहीद हुआ सीमा परदुख में डूबे थे गंगाधर,
पुत्र गया था माता के हितगर्वयुक्त था मन जो आहत 
पर बेटे की सुध धुँधलायेभीगी आँखेंकौन बताये,
कैसे बीते पुत्रवधू काखड़ा शेष जीवन मुँह बाये ।।४।।

राधे तपताजलता ज्वर मेंअकुलाता रह रह अन्तर में,
तन की पीड़ा सब गयी भूलउठता मन में एक प्रश्न-शूल 
दृगजल बहताकह जायेगायदि नहीं दिहाड़ी पायेगा,
कैसे कल चावल-भात बिनाबच्चों की भूख मिटायेगा ।।५।।

4.5.13

अनमोल जीवन

विश्व वंचित कर रहा है,
है सकल संवाद स्थिर,
दृष्टि में दिखती उपेक्षा,
भाव तम एकांत में घिर।

मान लो संकेत है यह,
कर्म एकल, श्वेत है यह,
आत्म की राहें प्रतीक्षित,
रत्नपूरित खेत है यह।

एक क्षण भी नहीं रोना,
हृदय की ऊर्जा पिरोना,
मिल गया अवसर अनूठा,
एक क्षण भी नहीं खोना।

आत्म है अनमोल जीवन,
उस विरह को खोल जीवन,
देख ले क्या क्या छिपा है,
जान ले क्या मोल जीवन।