न दैन्यं न पलायनम्
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आश्चर्य
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17.7.22
जीवन जीने चढ़ आता है
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जब छूट गया , सब टूट गया , विधि हर प्रकार से रूठ गया , मन पृथक , बद्ध , निश्चेष्ट दशा , सब रुका हुआ हो , तब सहसा , वह उठ...
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20.3.16
चकित हूँ
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घिर रहे आनन्द के कुछ मेघ नूतन , सकल वातावरण शीतल हो रहा था । पक्षियों के कलरवों का मधुर गुञ्जन , अत्यधिक उत्साह उ...
8 comments:
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