न दैन्यं न पलायनम्
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अर्थव्यवस्था
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21.11.12
शिक्षा - अर्थ व समाज
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औपचारिक व अनौपचारिक शिक्षा का स्वरूप तथा शिक्षा के उद्देश्यों की समझ ही पर्याप्त न होगी यदि हम उसे आधुनिक अर्थतन्त्र और समाज की गतिमयता स...
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10.10.12
शाम है धुआँ धुआँ
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शाम थी, वह भी रविवार की, बैठकर सोच रहा था कि सप्ताहान्त कितना छोटा होता है, केवल दो दिन का। क्या न कर डालें इन दो दिनों में, यह सोचने में...
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6.7.11
व्यवस्थित परिवेश
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सुबह का समय , दोनों बच्चों को विद्यालय भेजने में जुटे माता - पिता। यद्यपि बेंगलुरु में विद्यालय सप्ताह में 5 दिन ही खुलते हैं पर प्रतिदिन...
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4.8.10
मॉल और माइक्रोसॉफ्ट
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तब पढ़ाई हो , यह कारण रहता था पिता जी के साथ बाजार न जाने का। अब लड़ाई न हो , इस कारण से बाजार जाना पड़ता है। हमारी भागने की प्रवृत्ति...
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