ना जानू मैं अन्तरतम में,
अवचेतन की सुप्त तहों में,
अनचीन्हा, अनजाना अब तक,
कौन छिपा सा रहता है ?
मन किससे बातें करता है ?
भले-बुरे का ज्ञान कराये,
असमंजस में राह दिखाये,
इस जीवन के निर्णय लेकर,
जो भविष्य-पथ रचता है ।
मन किससे बातें करता है ?
पीड़ा का आवेग, व्यग्रता,
भावों का उद्वेग उमड़ता,
भीषण आँधी, पर भूधर सा,
अचल, अवस्थित रहता है ।
मन किससे बातें करता है ?
निद्रा के एकान्त महल में,
चुपके से, हौले से आकर,
भावों की मनमानी क्रीड़ा,
स्वप्न-पटों से तकता है ।
मन किससे बातें करता है ?