न दैन्यं न पलायनम्

28.6.15

कब तुम्हारा स्मरण हो

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आज कोई दुख नहीं है, निशा सुख में डूबती है, समय का आवेग भी निश्चिन्त बहता जा रहा है, जब समुन्दर राग और आह्लाद के लेते हिलोरें, सुध स्वयं...
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21.6.15

आँखों की भाषा

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कितने स्वप्न सँजों रखे हैं, कब से सोयी है अभिलाषा, चुपके चुपके कह जाती है, आँखों से आँखों की भाषा । १। ज्ञात नहीं मैं कहाँ खड़ा हूँ, ...
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14.6.15

आश्रय-हाथ बढ़ाये कौन

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कौन दिशा उड़ जाये पंछी, जाकर उसे बताये कौन, तारे सब छिप बैठ गये हैं, पंथहीन नभ, जाये कौन, अंत नहीं, कुछ मंत्र नहीं है, साधन सीमित, तन...
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7.6.15

सूरज ढूढ़ रहे अंधों में

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स्वार्थ दृष्टिगत संबंधों में, जीवन बीता अनुबंधों में, ढक कर सर पर बोरे डाले, सूरज ढूँढ़ रहे अंधों में। मद में रत, बौराया नित मन, गति...
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31.5.15

वर्तमान

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रत विश्व सतत, मन चिन्तन पथ, जुड़कर खोना या पंथ पृथक, क्या निहित और क्या रहित, प्रश्न, आश्रय, आशय, आग्रह शत शत ।।१।। प्रातः प्रवेश, स्...
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24.5.15

आशा

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आशा की अँगड़ाई, फैली दिगदिगन्त है । बीत गये दुख-पतझड़, जीवन में बसन्त है ।।  पथ पर पग दो चार बढ़े, था मन उमंग में उत्साहित । भावनायें ...
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17.5.15

प्रेम अपना

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परिचयी आकाश में, हर रोज तारे टूटते हैं, लोग थोड़ा साथ चलते और थकते, छूटते हैं, किन्तु फिर भी मन यही कहता, तुम्हारे साथ जीवन, प्रेम के च...
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10.5.15

तुम्हारा साथ

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आज   मेधा   साथ   देती , उमड़ता विश्वास भी है । चपल मन यदि शान्त बैठा, यह तुम्हारा साथ ही है ।।१।। दिख रहा स्पष्ट सब कुछ, यदि ...
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3.5.15

हेतु तुम्हारे

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संग   तुम्हारे   राह   पकड़   कर ,   छोड़ा   सब   कुछ   बीते   पथ   पर , मन की सारी उत्श्रंखलता,  सुख पाने की घोर विकलता, मुक्त उड़ा...
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26.4.15

आस कैसी

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सोचता हूँ सहज होकर, भावना से रहित होकर, अपेक्षित संसार से क्या ? हेतु किस मैं जी रहा हूँ ? भले ही समझाऊँ कितना, पर हृदय में प्रश्न उ...
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19.4.15

जीवन और मैं

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समय का भण्डार जीवन, कर्म का आगार जीवन, व्यक्तियों की विविधता में, बुद्धि का व्यापार जीवन । समय की निर्बाध तृष्णा, काटती रहती बराबर, ...
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12.4.15

उलझी लट सुलझा दो

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मन की उलझी लट सुलझा दो, मेरे प्यारे प्रेम सरोवर । लुप्त दृष्टि से पथ, दिखला दो, स्वप्नशील दर्शन झिंझोड़कर ।।१।। ढूढ़ा था, वह लुप्त हो...
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5.4.15

रात्रि विरहणा, दिन भरमाये

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जगता हूँ, मन खो जाता है, तुम्हे ढूढ़ने को जाता है । सोऊँ, नींद नहीं आ पाती, तेरे स्वप्नों में खो जाती । ध्यान कहीं भी लग न पाये, रात्...
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29.3.15

दुख-पतझड़

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जीवन पथ पर एक सुखद भोर, ले आई पवन मलयज, शीतल, अनुभव की स्मृति छोड़ गयी, एक भाव सहज, मधुमय, चंचल । निश्चय ही मन के भावों में, सावन के झों...
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22.3.15

आशान्वित मन

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आशाओं से संचारित मन, करने की कुछ चाह हृदय में । स्वप्नों से कुछ दूर अवस्थित, अब जीवन को पाया हमने ।।१।। स्थिर है मन संकल्पों में, लग...
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15.3.15

आये तुम

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स्वप्न देखने का जीवन में, साहस तो कर बैठे थे । आये तुम, पीछे पीछे, देखो स्वप्न और आ जायेंगे ।।१।। कठिन परिस्थियों में भी, एक किरण दिखी ...
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8.3.15

तुम ही

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जहाँ देखूँ, दीखता आकार तेरा, स्वप्न चुप है, कल्पनायें अनमनी हैं ।।१।। पा रहा हूँ प्रेम, साराबोर होकर, आज पुलकित रोम, मन में सनसनी है ।...
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1.3.15

जीवन-सार

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नहीं पुष्प में पला, नहीं झरनों की झर झर ज्ञात मुझे, नहीं कभी भी भाग्य रहा जो सुख सुविधायें आकर दे । इच्छायें थी सीमित, सिमटी, मन-दीवारों...
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22.2.15

आज प्रियतम जीवनी में आ रहा है

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अकेला उन्मुक्त उड़ना चाहता था, मेघ सा विस्तृत उमड़ना चाहता था, स्वतः प्रेरित, दूसरों के अनुभवों को, स्वयं के अनुरूप गढ़ना चाहता था । क...
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15.2.15

मन और जीवन

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मैं   जीवन   बाँधता   हूँ   और   मन   से   रोज   लड़ता   हूँ , लुढ़कता ध्येय से मैं दूर, लेकिन फिर भी चढ़ता हूँ । बहुत कारक, विरोधों क...
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