न दैन्यं न पलायनम्

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25.1.15

स्वपीड़न

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कोई कष्ट देता, सहजता से सहते, पीड़ा तो होती, पर आँसू न बहते । कर्कश स्वरों में भी, सुनते थे सरगम, मन की उमंगों में चलते रहे हम । कभी...
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