न दैन्यं न पलायनम्

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9.3.21

मित्र -१५(श्रम और श्रेय)

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अशोक व्यग्र थे। जिस कार्य को यत्न, परिश्रम और लगन से खड़ा करने में वर्षों लगे, सहसा कोई आ टपकता है और श्रेय लेकर चला जाता है। अशोक भावनात्मक...
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