न दैन्यं न पलायनम्
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2.10.21
शब्द सामर्थ्य
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शब्द भाव-गाम्भीर्य समझने में होते असमर्थ, व्यर्थ ही डूबा जाता अर्थ । कल्पना को चित्रित कर सके, वाक्य में ऐसी अब सामर्थ्य कहाँ है ? मनुज ...
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24.8.13
नाम, शब्द, रूप
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भाषा से उत्पन्न तरंग मन के मार्ग से होते हुये तुरीय अवस्था तक पहुँच गयी। तरंग यदि सीमित होती तो चर्चा संभवतः दो या तीन पोस्ट में समाप्त हो...
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27.2.13
वह कविता है
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मन की कह दे, वह कविता है, सब की कह दे, वह कविता है, निकसे कुछ कुछ अलसायी सी, अपने में ही सकुचायी सी, शब्द थाप बन आप खनकती, रस स...
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