न दैन्यं न पलायनम्
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लोकतन्त्र
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25.9.21
जय कोटि जनों की अभिलाषा
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(जब जब जनाधिकारों का हनन होता है, मन चीत्कार कर उठता है। आज पड़ोस में पुनः वही हो रहा है जो ३२ वर्ष पूर्व चीन के थियानमेन चौक पर हुआ था। तब ...
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2.8.15
आकांक्षा से भरे नयन हैं
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आकांक्षा से भरे नयन हैं और असुँअन की धार बहे, सक्षम खाली हाथ, उठे हैं सम्मुख, अपनी बात कहे, सूचक हैं ये, प्रश्न उठाते, आज आपके बारे में,...
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25.1.14
सड़कों पर लोकतन्त्र
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नहीं, संदर्भ बिल्कुल वह नहीं है जो आप समझ रहे हैं। सड़कों पर किये हुये विशेष कृत्य पर नहीं, वरन यह शीर्षक सड़कों पर किये हुये वृहद अवलोकनो...
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25.8.12
झण्डा ऊँचा रहे हमारा
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स्वतन्त्रता दिवस था, सुबह सर ऊँचा कर भारत के झण्डे के सामने राष्ट्रगान का सस्वर पाठ किया था। जब भी राष्ट्रगान बजता है, दृष्टि स्वतः ही झ...
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