न दैन्यं न पलायनम्
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बन्धता
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12.6.16
कविता का कालबन्ध
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पिछले दो वर्षों में मुख्यतः कविता ही लिखीं, वह भी परस्पर असंबद्ध विषयों पर। कभी उत्साह की आस, कभी दर्शन की नीरवता, कभी तथ्यों की चोट, कभी ...
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