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27.8.11

हाईवे के ट्रक

कभी भारी भरकम ट्रकों को राष्ट्रीय राजमार्ग पर भागते देखा है? देखा होगा और उससे पीड़ित भी हुये होंगे पर उनके चरित्र पर ध्यान नहीं दिया होगा। सामने से आते ट्रक आपको अपनी गति कम करने और बायें सरक लेने को विवश कर देते हैं, बड़ा भय उत्पन्न करते हैं ये ट्रक सड़क पर, आप चाहें न चाहें एक आदर देना पड़ता है, जब तक ये निकल न जाये आप निरीह से खड़े रहते हैं, सड़क से आधे उतरे।

यदि आप भी इन ट्रकों की दिशा में जा रहे हों तो संभवतः भय नहीं रहता है। आपके वाहन की गति बहुधा इन भारी भरकम ट्रकों से बहुत अधिक रहती है, यदि आप उन्हें एक बार पार कर लें तो उनसे पुन: भेंट होने की संभावना कम ही होती है। थोड़ी सावधानी बस उन्हें पार करने में रखी जाये तो निरीह से ही लगते हैं ये ट्रक।

कभी कभी यही ट्रक प्रतियोगिता पर उतर आते हैं। पिछले दिनों मैसूर से बंगलोर आते समय लगभग एक घंटे तक यह प्रतियोगिता देखी भी और उससे पीड़ित भी होते रहे। दो भारी भरकम ट्रक आगे चल रहे थे, एक दूसरे से होड़ लगाते हुये। एक दूसरे से सट कर चल रहे थे, कभी एक थोड़ा आगे जाने का प्रयास करता तो कभी दूसरा, कोई भी स्पष्ट रूप से आगे नहीं निकल पा रहा था। दोनों की ही गति 50 के आसपास थी क्योंकि मेरा वाहन भी लगातार वही गति दिखा रहा था। सड़क 100 की गति के लिये सपाट है, आपका वाहन भी उन्नत तकनीक के इंजन से युक्त है और 150 की गति छूने की क्षमता रखता है। उन ट्रकों की प्रतियोगिता के आनन्द के सामने आपके वाहन की गति धरी की धरी रह जाती है। 50 की गति सड़क खा जाती है, 50 की गति हाईवे के ये ट्रक। आप कितना उछलकूद मचा लीजिये, आपका वाहन कितना हार्न फूँक ले, जापानी विशेषज्ञों ने कितना ही शक्तिशाली इंजन बनाया हो, आपके वाहन का आकार कितना ही ऐरोडायनिमिक हो, आप अपनी एक तिहाई क्षमता से आगे बढ़ ही नहीं सकते।

यह सब देख रागदरबारी के प्रथम दृश्य का स्मरण हो आया। सड़क पर और आने वाले यातायात पर अपना जन्मसिद्ध बलात अधिकार जमाये इन ट्रकों का कुछ नहीं किया जा सकता है। अपने आगे दसियों किलोमीटर का खाली मार्ग उन्हें नहीं दिखता है, पीछे से सवेग चले आ रहे वाहनों की क्षमताओं का भी भान नहीं है उन्हें, यदि उन्हें कुछ दिखता है तो उनके बगल में चल रहा उनके जैसा ही भारी भरकम और गतिहीन ट्रक, आपसी प्रतियोगिता लगा उनका मन और उसी खेल में बीतता उनका जीवन।

उपयुक्त तो यही होता कि दोनों ही एक ही लेन में आ जाते और पीछे से आने वाले गतिशील वाहनों को आगे निकल जाने देते, जिससे उनकी भी चाल अवरोधित नहीं होती। वे ट्रक नहीं माने, स्वयं तो प्रतियोगिता का आनन्द उठाया और हम सबको पका दिया। वह तो भला हो कि एक जगह पर तीन लेन का रास्ता मिल गया, वहाँ पर थोड़ी गति बढ़ाकर कई वाहन उन मदमत्त ट्रकों से आगे निकल गये।

जाते जाते बस पीछे देख ट्रकों को यही कह पाये कि "भैया जब दम नहीं है तो काहे सड़क घेरे चल रहे हो।"