न दैन्यं न पलायनम्
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नीम
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31.10.12
एक बड़ा था पेड़ नीम का
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बचपन की सुन्दर सुबहों का भीना झोंका, आँख खुली, झिलमिल किरणों को छत से देखा, छन छन कर जब पवन बहे, तन मन को छूती, शुद्ध, स्वच्छ, मधुरिम ब...
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