न दैन्यं न पलायनम्

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18.10.15

तुम समर्थ हो

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यदि कष्टों की धार बहे अनियन्त्रित, नष्ट करो तुम उस कारण का स्रोतस्थल । व्यर्थ कष्ट क्यों सहो,मनुज तुम श्रेष्ठ सबल हो, प्रभुसत्ता स्थापि...
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