न दैन्यं न पलायनम्
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दर्शन
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11.8.26
मैं भोग रहा या स्वयं भुक्त
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न कर्मबन्ध , न संस्कार , न चित्तवृत्ति , न क्लेश पार , उस ओर अकेले बैठ गया , मेरा परिचय ही निर्विकार। न विषय रमण , न झंकृत म...
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15.5.21
मैं उत्कट आशावादी हूँ
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मैं उत्कट आशावादी हूँ। मत छोड़ समस्या बीच बढ़ो, रुक जाओ तो, थोड़ा ठहरो, माना प्रयत्न करने पर भी, श्रम, साधन का निष्कर्ष नहीं, यदि है कठोर तम, व...
10 comments:
11.1.15
कुछ पल अपने
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दिन तो बीता आपाधापी, यथारूप हर चिंता व्यापी, कार्य कुपोषित, व्यस्त अवस्था, अधिकारों से त्रस्त व्यवस्था, होड़, दौड़ का ओढ़ चढ़ाये, अवस...
13 comments:
6.8.14
भौतिकता अनुकूल नहीं है
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उमड़ पड़े अनगिनत प्रश्न , जब कारण का कारण पूछा । जगा गये सोती जिज्ञासा , जीवन के अनसुलझे उत्तर ।। १।। ...
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12.7.14
क्या नियत हो?
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ध्येय जीवन का नियत करना स्वयं, और यह भी नियत करना, ध्येय में बँध कर रहूँ, या रहूँ उन्मुक्त सा। पैर धरती पर बँधे हों, या गगन...
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6.4.13
अँधेरे को बाहर फेंकना है
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एक दिन देवेन्द्र जी ने एक कहानी सुनायी जो बचपन में उनके पिताजी ने सुनायी थी। कहानी सुनने के बाद ही उसका आशय स्पष्ट हो पायेगा। आप भी सुनिय...
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3.4.13
त्वम् चरैवेति
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विविध विधा के फूल खिले हैं , आकर्षण के थाल सजे है, किन्तु शब्द गुञ्जित मन में, त्वम् चरैवेति, त्वम् चरैवेति ।।१।। भाव...
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