न दैन्यं न पलायनम्
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जिजीविषा
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7.8.22
धर बल, अगले पल चल जीवन
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शत पग , रत पग , हत पग जीवन , धर बल , अगले पल चल जीवन। रथ रहे रुके , पथ रहे बद्ध , प्रारम्भ , अन्त से दूर मध्य , सब ...
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17.7.22
जीवन जीने चढ़ आता है
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जब छूट गया , सब टूट गया , विधि हर प्रकार से रूठ गया , मन पृथक , बद्ध , निश्चेष्ट दशा , सब रुका हुआ हो , तब सहसा , वह उठ...
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3.8.19
दुख सहना पर पीर पिरोना
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बाहर तीखे तीर चल रहे , सीना ताने वीर चल रहे , प्यादे हो, हद में ही रहना , दोनों ओर वजीर चल रहे। मन अतरंगी ख्वाब न पाल...
10 comments:
1.3.15
जीवन-सार
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नहीं पुष्प में पला, नहीं झरनों की झर झर ज्ञात मुझे, नहीं कभी भी भाग्य रहा जो सुख सुविधायें आकर दे । इच्छायें थी सीमित, सिमटी, मन-दीवारों...
15 comments:
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