न दैन्यं न पलायनम्
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चिन्तन
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चिन्तन
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13.3.16
जीवन - अब तक
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(विचारों का प्रवाह न काव्यरूप में होता है और न ही गद्यरूप में। वह तो अपनी लय में बहता है, उसे उसकी लय में समझ पाना और लिख पाना कठिन है, फि...
9 comments:
30.11.13
क्या बोलूँ मैं
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मैं, बैठकर आनन्द से, वाद के विवाद से, उमड़ते अनुनाद से, ज्ञान को सुलझा रहा हूँ, सीखता हूँ, सीखने की लालसा है, व्यस्तता है ...
39 comments:
7.8.13
सोचने वाली भाषा
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फेसबुक पर ज्ञानदत्तजी की एक पोस्ट पर ध्यान गया। उनका कहना था कि जब वह भावुक होते हैं तो हिन्दी में सोचते हैं, जब अच्छे निर्णय लेने होते ह...
58 comments:
8.12.12
मन है, तनिक ठहर लूँ
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मन फिर है , जीवन के संग , कुछ गुपचुप बातें कर लूँ । बैठ मिटाऊँ क्लेश, रहा जो शेष, सहजता भर लूँ ।। देखो तो दिनभर...
64 comments:
3.10.12
मैं समय की भँवर में हूँ
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परिस्थितियों में बँधा मैं , राह मेरी बनी कारा , श्रव्य केवल प्रतिध्वनियाँ, यदि किसी को भी पुकारा, देखना है, और कब तक, स्व...
57 comments:
11.6.11
स्वप्न-चिन्तन, द्वन्द-जीवन
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लेटने के बाद और नींद आने तक किया गया चिन्तन न तो चिन्तन की श्रेणी में आता है और न ही स्वप्न की श्रेणी में। दिन भर के एकत्र अनुभव से उपजे ...
62 comments:
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