न दैन्यं न पलायनम्

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13.7.21

सात चक्र - व्यवहार

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योगसूत्र और गीता में योग की तीन परिभाषायें मिलती हैं। योगः चित्तवृत्ति निरोधः (योगसूत्र १.२)- योग चित्त की वृत्तियों का निरोध है। समत्वं योग...
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8.7.21

सात चक्र - प्रक्रिया

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  ऊर्जा के चक्रों में क्रमिक गतिमय होना कोई क्षणिक उपलब्धि नहीं है, इसके लिये निश्चित रूप से एक प्रक्रिया में निहित हो क्रमशः बढ़ना पड़ता है...
16 comments:
31.8.19

अभ्यास और वैराग्य - ४

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योग एक प्रायोगिक प्रक्रिया है और भगवतगीता योग की व्याख्या प्रायोगिक दृष्टिकोण से करती है। कर्तव्य, आत्मा, स्थितिप्रज्ञ, कर्मयोग, भक्तियोग,...
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