न दैन्यं न पलायनम्

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9.10.21

मुक्ति का उपहार दे दो

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  अनवरत रत, पथ चली शत,   जीवनी रुक गयी मानो। प्रबल कल कल, सकल उद्धत, ऊर्जा चुक गयी मानो। विषय अनगिन किन्तु मन का, सिकुड़ता विस्तार सहसा। प्र...
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17.6.21

हनुमानबाहुक - क्रम

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हनुमानबाहुक में कुल ४४ छन्द हैं, अवधी में। पहले १३ छन्दों में स्तुति है, हनुमानजी के महान कृत्यों और विशिष्ट गुणों का वर्णन है। पहले छन्द मे...
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17.7.13

उथल पुथल में क्रम

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एक बहुत पुराना व्यसन है, हम मानवों का। हम हर क्रिया, हर रहस्य, हर गतिविधि को किसी सिद्धान्त से व्यक्त करने का प्रयास करते हैं। इस प्रकार ह...
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