न दैन्यं न पलायनम्

Showing posts with label उलझन. Show all posts
Showing posts with label उलझन. Show all posts
12.4.15

उलझी लट सुलझा दो

›
मन की उलझी लट सुलझा दो, मेरे प्यारे प्रेम सरोवर । लुप्त दृष्टि से पथ, दिखला दो, स्वप्नशील दर्शन झिंझोड़कर ।।१।। ढूढ़ा था, वह लुप्त हो...
14 comments:
›
Home
View web version
Powered by Blogger.