न दैन्यं न पलायनम्

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10.7.21

आँखों के दो तारे तुम

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  आत्म-अधिक हो प्यारे तुम, आँखों के दो तारे तुम ।   रात शयन से प्रात वचन तक, सपनों, तानों-बानों में, सीख सीख कर क्या भर लाते विस्तृत बुद्धि ...
6 comments:
13.3.21

मित्र - १६(उत्पात और संदेश)

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उत्पात और दण्ड के संदर्भ में सुन्दरकाण्ड का वह प्रकरण अत्यन्त रोचक व गूढ़ है जिसमें सीता का पता लगाने के बाद वानर दल वापस आता है और अपने राज...
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