न दैन्यं न पलायनम्
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6.3.16
हार गया अपने ही रण
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आज वेदना मुखर हो गयी, अनुपस्थित फिर भी कारण । जगत जीतने को आतुर पर, हार गया अपने ही रण ।। ध्येय दृष्ट्य, उत्साहित तन मन, लगन लगी...
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