न दैन्यं न पलायनम्

31.7.22

जहाँ से चले थे, वहीं पर खड़े हैं

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वही प्रश्न हैं और उत्तर वही हैं , नहीं ज्ञात यह भी , सही या नहीं हैं , समस्या भ्रमित , हर दिशा अग्रसर है , नहीं प्रश्न ...
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24.7.22

वयं राष्ट्रे जागृयाम

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नाद निनाद , सतत उत्थान , वयं राष्ट्रे जागृयाम। गति में शक्ति , शक्ति में मति हो , आवश्यक जो , लब्ध प्रगति हो , रेल हेतु ...
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17.7.22

जीवन जीने चढ़ आता है

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जब छूट गया , सब टूट गया , विधि हर प्रकार से रूठ गया , मन पृथक , बद्ध , निश्चेष्ट दशा , सब रुका हुआ हो , तब सहसा , वह उठ...
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6.11.21

मित्र - ४०(भेदी और कृपापात्र)

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भेदियों की कारण-श्रृंखला में एक प्रमुख कारण कृपापात्र बनने का आया। कृपापात्र बनने का प्रयास आगामी लाभ पाने के लिये या हानि से बचने के लिये क...
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4.11.21

मित्र - ३९(भेदी और प्राप्ति)

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भेदी बनने के कई तुच्छ कारण भी थे। तीन मुख्य कारण पिछले ब्लाग में समझे जा चुके हैं। कुछ और कारण जो पंकज, रवीन्द्र और आलोक ने बताये हैं, उन्हे...
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2.11.21

मित्र - ३८(भेदी और कारण)

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भेदी होने के कारण ढूढ़ने बैठा तो एक के बाद एक कई कारण मिलते गये। जैसा कि पिछले ब्लाग में चर्चा की थी कि कोई भी कारण दीर्घकाल में उपयोगी सिद्...
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30.10.21

मित्र - ३७(भेदी मनःस्थिति)

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आपके साथ रहने वालों का भेदी बन जाना, यह सहजीविता का सामान्य लक्षण नहीं है। यह समाज के वे स्खलनक हैं जिन्हें आभास नहीं होता है कि जब समाज का ...
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28.10.21

मित्र - ३६(विघ्नमना भेदिये)

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हम अपने बुद्धिबल और साहस से जिस स्तर तक पहुँच रहे थे, वहाँ पर बहुत अधिक दिनों तक बने रहना संभव नहीं हो रहा था। जिस दिन काण्डस्थल पर साक्षात ...
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