न दैन्यं न पलायनम्

30.3.21

मित्र - २१(प्रभात के अमिताभ)

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अमिताभ बहुत अच्छा गाते थे और अभी भी नियमित रूप से किसी एप्प में अपने सुरों की शीतलता बिखेरते रहते हैं। छात्रावास में उनका आना तीन वर्ष बाद ह...
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27.3.21

मित्र - २०(संघर्ष और विकल्प)

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कहते हैं कि किसी दीर्घकालिक संघर्ष को समझना हो तो शतरंज खेलना सीखना चाहिये। अपने पास उपलब्ध शक्ति के अनुसार किस प्रकार आक्रमण और रक्षा की जा...
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23.3.21

मित्र - १९(काण्ड और कौशल)

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अनुमति न मिलना, मिलना तो भी कम समय के लिये, यदि कुछ अन्यथा करने का प्रयास तो पकड़े जाना, इस अनुशासनिक कसाव ने हम सबको अनियमित करने के लिये ब...
20.3.21

मित्र - १८(तुलना और अतृप्ति)

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अतृप्ति के मूल में तुलना है। सामान्य से विशेष होने की इच्छा अतृप्ति का कारण बनती है। प्रयत्नों की चेष्टा प्रक्रिया बन जाती है और हम व्यस्त ह...
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16.3.21

मित्र - १७(दण्ड और संदेश)

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उत्पात और दण्ड, दोनों ही अपने अपने संदेश देने का प्रयत्न करते हैं। एक नियत संदेश देने के लिये उत्पात या दण्ड की मात्रा कम रही या अधिक, इस पर...
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13.3.21

मित्र - १६(उत्पात और संदेश)

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उत्पात और दण्ड के संदर्भ में सुन्दरकाण्ड का वह प्रकरण अत्यन्त रोचक व गूढ़ है जिसमें सीता का पता लगाने के बाद वानर दल वापस आता है और अपने राज...
9.3.21

मित्र -१५(श्रम और श्रेय)

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अशोक व्यग्र थे। जिस कार्य को यत्न, परिश्रम और लगन से खड़ा करने में वर्षों लगे, सहसा कोई आ टपकता है और श्रेय लेकर चला जाता है। अशोक भावनात्मक...
6.3.21

मित्र - १४(जागरण और निर्णय)

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जिस समय छात्रावास में आये थे, लगभग १०० छात्रावासी और १० कक्ष थे जो ७ वर्षों बाद बढ़कर क्रमशः १३० और १२ हो गये। इनमें से दो कक्ष बड़े थे, शेष...
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2.3.21

मित्र - १३(भोजनचक्र और निद्रा)

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यह तथ्य बहुत बात में ज्ञात हुआ कि प्रातः शीघ्र उठने के लिये रात्रि १० बजे तक सो जाना ही पर्याप्त नहीं है। आयुर्वेद के सिद्धान्त बताते हैं कि...
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27.2.21

मित्र - १२(छात्रावास और दिनचर्या)

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छात्रावास की दिनचर्या, ७ वर्ष तक एक सी ही रही, कोई विशेष बदलाव नहीं, बस ऋतुओं के अनुसार थोड़ा आगे पीछे। जैसे कोई पाठ बार बार पढ़ने से याद हो...
23.2.21

मित्र -११(भोज्य और रहस्य)

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छात्रावास में किसी को एक दूसरे के बारे में यह ज्ञात नहीं था कि कौन धनाड्य परिवार से है, कौन मध्यमवर्गीय है और कौन आर्थिक कठिनाईयों के बीच पढ...
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20.2.21

मित्र - १०(भोजन और सामूहिकता)

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अभी कुछ दिन पहले एक व्याख्यान दे रहा था, वर्तमान परिदृश्य में खान पान में आये बदलाव के संबंध में। विषय बड़ा ही रोचक था और उससे भी रोचक उस पर...
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16.2.21

मित्र - ९(छात्रावास का भोजन)

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अभी कुछ दिन पहले प्रातः टहलते समय ठंड लग गयी। शीत के प्रभाव से उदर विकार हुआ और एक दिन घर पर ही विश्राम करना पड़ा, अगले दिन सब सामान्य हो गय...
13.2.21

मित्र - ८(भोजन एक दृष्टिकोण)

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कहते हैं कि यदि ठीक से उगाया न हो, ठीक से पकाया न हो, ठीक से चबाया न हो, ठीक से खाया न हो और ठीक से पचाया न हो तो भोजन अपना प्रभाव नहीं छोड़...
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9.2.21

मित्र - ७(विद्यालय और व्यवस्था)

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किसी भी छात्र के लिये दस वर्ष की अवस्था में अपने घर से दूर छात्रावास में रह कर पढ़ना कुछ स्वाभाविक प्रश्न उठाता है। ऐसा नहीं था कि मेरा घर क...
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