न दैन्यं न पलायनम्

28.9.19

अभ्यास और वैराग्य - १२

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सत्य के संदर्भों से शास्त्र भरे पड़े हैं। संभवतः इसलिये क्योंकि इस पर नियमन किये बिना जगत का ताना बाना सम्हाल पाना अत्यधिक कठिन है। सत्य ब...
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24.9.19

अभ्यास और वैराग्य - ११

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यम का पक्ष सामाजिक है, नियम व्यक्तिगत पक्ष निरूपित करते हैं। सारे यम नियम किसी न किसी प्रकार से एक दूसरे से संबद्ध हैं। एक उपांग विशेष का ...
21.9.19

अभ्यास और वैराग्य - १०

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एक प्रश्न उठ सकता है कि योग के आठ अंगों में क्या कोई क्रम है, जिसका पालन करना आवश्यक हो? इसी प्रकार क्या दस यम और नियमों में भी कोई क्रम र...
17.9.19

अभ्यास और वैराग्य - ९

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यम और नियम कुल दस गुण हैं। अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह यम कहलाते हैं। शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय और ईश्वर प्राणिधान नियम ह...
14.9.19

अभ्यास और वैराग्य - ८

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टीकाकारों का मत है कि पतंजलि योगसूत्र में तीन प्रकार के साधन बताये गये हैं। पहला अभ्यास और वैराग्य का, दूसरा क्रियायोग का और तीसरा अष्टांग...
10.9.19

अभ्यास और वैराग्य - ७

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अभ्यास और वैराग्य से योग की किस स्थिति तक पहुँचा जा सकता है? यदि उस स्थिति तक न पहुँच पाये तो क्या पुनः प्रारम्भ से प्रयास करना होगा? यद्य...
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7.9.19

अभ्यास और वैराग्य - ६

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वैराग्य को पतंजलि ने दो सूत्रों में परिभाषित किया है। दृष्टानुश्रविकविषयवितृष्णस्य वशीकारसंज्ञा वैराग्यम् - देखे और सुने विषयों में वि...
3.9.19

अभ्यास और वैराग्य - ५

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पतंजलि अभ्यास को दो सूत्रों में परिभाषित करते हैं।  तत्र स्थितौ यत्नोऽभ्यासः - वहाँ पर यत्नपूर्वक बने रहना अभ्यास है। स तु दीर्घकालन...
31.8.19

अभ्यास और वैराग्य - ४

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योग एक प्रायोगिक प्रक्रिया है और भगवतगीता योग की व्याख्या प्रायोगिक दृष्टिकोण से करती है। कर्तव्य, आत्मा, स्थितिप्रज्ञ, कर्मयोग, भक्तियोग,...
27.8.19

अभ्यास और वैराग्य - ३

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मन का एक रूप है कि यह स्थिर नहीं रहता, इधर उधर भागता है, शीघ्र ही उकता जाता है, नयापन ढूढ़ता है, उद्योग और श्रम से भागता है, इन्द्रियों के...
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