न दैन्यं न पलायनम्
26.7.19
मैत्री, करुणा, मुदिता, उपेक्षा
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पतंजलि योग सूत्र के प्रथम पाद समाधिपाद के ३३ वें सूत्र में है यह उल्लेख। कुल १९६ सूत्रों में संकलित यह दर्शन, अन्य आधुनिक दर्शनों की भाँति...
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21.7.19
यह निश्चय अब, नहीं डरूँगा
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अपने पथ से नहीं टरूँगा, यह निश्चय अब, नहीं डरूँगा । यह सृष्टि रही विस्तीर्ण विविध, दिक उदित विदित अनुक्रम अशेष, हैं कार्य प्रचुर, ...
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13.7.19
सहसा हृास नहीं होता है
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दोष प्रचुर संरक्षण पाते , आँखें मूंदी जाती होगी , मति - क्षति - विकृति , ज्ञात नहीं पर , नित अनगढ़ बढ़ जाती होगी , धरन...
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7.7.19
खोटो खरो रावरो हौं
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बुरा हूँ , अच्छा हूँ , जैसा भी हूँ , आपका हूँ। यह एक साधारण सा लगने वाला वाक्य जीवन को कितने निरर्थक श्रम से बचा लेता ...
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24.12.17
शक्ति बिना उत्सव सब फीके
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रस की चाह प्रबल, घट रीते, शक्ति बिना उत्सव सब फीके। सबने चाहा, एक व्यवस्था, सुदृढ़ अवस्था, संस्थापित हो, सबने चाहा, स्वार्थ मुक्त ...
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28.1.17
सबके अपने युद्ध अकेले
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सबके अपने युद्ध अकेले, और स्वयं ही लड़ने पड़ते, सहने पड़ते, कहने पड़ते, करने पड़ते, वह सब कुछ भी, जो न चाहे कभी अन्यथा। ...
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21.12.16
मित्र हो मन
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कब बनोगे मित्र, कह दो, शत्रुवत हो आज मन, काम का अनुराग तजकर, क्रोध को कर त्याग मन, दूर कब तक कर सकोगे, लोभ-अर्जित पाप मन, और कब दोगे...
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