न दैन्यं न पलायनम्

27.3.16

तेरा जीवन

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तूने अपना जीवन यदि, शब्दों में डाला, निष्फल है । जीवन तो तेरा वह होगा, जो शब्दों की उत्पत्ति बने ।।१।। आदर्शों की राह पकड़ कर, ...
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20.3.16

चकित हूँ

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घिर रहे आनन्द के कुछ मेघ नूतन , सकल वातावरण शीतल हो रहा था । पक्षियों के कलरवों का मधुर गुञ्जन , अत्यधिक उत्साह उ...
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13.3.16

जीवन - अब तक

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(विचारों का प्रवाह न काव्यरूप में होता है और न ही गद्यरूप में। वह तो अपनी लय में बहता है, उसे उसकी लय में समझ पाना और लिख पाना कठिन है, फि...
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6.3.16

हार गया अपने ही रण

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आज वेदना मुखर हो गयी, अनुपस्थित फिर भी कारण । जगत जीतने को आतुर पर, हार गया अपने ही रण ।। ध्येय दृष्ट्य, उत्साहित तन मन, लगन लगी...
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28.2.16

स्वयं ही समाया

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समर्पण हे देवी, तुम्हें आज जीवन, तुम्हें पा के, जीवन में सर्वस्व पाया । है मन आज मोदित, यह तन आज पुलकित, मैं मरुजीव सौन्दर्य-रस में ...
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21.2.16

मन मेरा तू

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कभी सुखों की आस दिखायी , कभी प्रलोभन से बहलाया । मन मेरा तू शत्रु निरन्तर , मुझको अब तक छलता आया ।। प्रभुता का...
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14.2.16

भौतिक प्यास

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उतर गया गहरी पर्तों में, जीवन का चीत्कार उमड़ कर । गूँज गया मन में कोलाहल, हिले तन्तु अनुनादित होकर ।।१।। स्वार्थ पूर्ति के शब्द...
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7.2.16

रूपसी

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यादों के चित्रकार ने थे, अति मधुर चित्र तेरे खींचे, तब हो जीवन्त कल्पना ने, ला अद्भुत रंग उसमें सींचे । सौन्दर्य-देव ने फिर उसमें, भर ...
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31.1.16

आत्म-परिचय

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जहाँ पर मन लग गया , मैं उस जगह का हो गया । पर सत्य परिचय खो गया ।। बाल्यपन में पुत्र बनकर , लड़कपन में मित्र...
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24.1.16

ध्येय और प्रेम

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आज फिर क्यों याद आयी, नाव फिर से डगमगाई । ध्येय में क्या आज, अपने भी पराये हो चुके हैं, ध्येय ही जीवन है, क्या और अब कुछ भी नहीं ह...
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17.1.16

वियोग

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मत दे वियोग सा असह्य शब्द, यह धैर्य-बन्ध बह जायेगा । यह महाप्रतीक्षा का पर्वत, बस पल भर में ढह जायेगा ।।१।। जीवन के पथ में संदोह...
19 comments:
10.1.16

सुख लौटा दो

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शापित धन - यश नहीं चाहिये , व्यथा - जनित रस नहीं चाहिये । त्यक्त , कुभाषित जीवन, तेरा संग पाने को अति आकुल है । तेर...
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3.1.16

ज्ञात होता यदि

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ज्ञात होता यदि मुझे उद्देश्य मेरा , व्यर्थ न मैं व्यथा का जीवन बिताता । छोड़ देता पत्थरों के संग्रहों को , यदि कही...
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