न दैन्यं न पलायनम्
28.2.16
स्वयं ही समाया
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समर्पण हे देवी, तुम्हें आज जीवन, तुम्हें पा के, जीवन में सर्वस्व पाया । है मन आज मोदित, यह तन आज पुलकित, मैं मरुजीव सौन्दर्य-रस में ...
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21.2.16
मन मेरा तू
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कभी सुखों की आस दिखायी , कभी प्रलोभन से बहलाया । मन मेरा तू शत्रु निरन्तर , मुझको अब तक छलता आया ।। प्रभुता का...
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14.2.16
भौतिक प्यास
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उतर गया गहरी पर्तों में, जीवन का चीत्कार उमड़ कर । गूँज गया मन में कोलाहल, हिले तन्तु अनुनादित होकर ।।१।। स्वार्थ पूर्ति के शब्द...
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7.2.16
रूपसी
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यादों के चित्रकार ने थे, अति मधुर चित्र तेरे खींचे, तब हो जीवन्त कल्पना ने, ला अद्भुत रंग उसमें सींचे । सौन्दर्य-देव ने फिर उसमें, भर ...
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31.1.16
आत्म-परिचय
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जहाँ पर मन लग गया , मैं उस जगह का हो गया । पर सत्य परिचय खो गया ।। बाल्यपन में पुत्र बनकर , लड़कपन में मित्र...
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24.1.16
ध्येय और प्रेम
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आज फिर क्यों याद आयी, नाव फिर से डगमगाई । ध्येय में क्या आज, अपने भी पराये हो चुके हैं, ध्येय ही जीवन है, क्या और अब कुछ भी नहीं ह...
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17.1.16
वियोग
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मत दे वियोग सा असह्य शब्द, यह धैर्य-बन्ध बह जायेगा । यह महाप्रतीक्षा का पर्वत, बस पल भर में ढह जायेगा ।।१।। जीवन के पथ में संदोह...
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10.1.16
सुख लौटा दो
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शापित धन - यश नहीं चाहिये , व्यथा - जनित रस नहीं चाहिये । त्यक्त , कुभाषित जीवन, तेरा संग पाने को अति आकुल है । तेर...
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3.1.16
ज्ञात होता यदि
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ज्ञात होता यदि मुझे उद्देश्य मेरा , व्यर्थ न मैं व्यथा का जीवन बिताता । छोड़ देता पत्थरों के संग्रहों को , यदि कही...
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27.12.15
जीवन-इच्छा
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बहुधा मैं असहाय पाता हूँ स्वयं को , खोखले दिखते मुझे उद्देश्य मेरे । विवश हो मैं चाहता हूँ गोद ऐसी , तुष्ट हूँ मै...
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20.12.15
राधा-माधव
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देहभान में प्राण तिरोहित, अन्तर आत्मा दुखी बेचारी । प्रेम भक्ति की सुधा चखा दो, राधा माधव, कृष्ण मुरारी ।।१।। भ्रम टूटा, मैं मुझ...
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13.12.15
और तुम
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मन की तहों में क्या हलचल मची है । न बोलूँ अगर, पर ये आँखें बतातीं ।।१।। अगर पूछ सकते तो धड़कन से पूछो । किसे कष्ट कितना, वह कहकर स...
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6.12.15
परिचय
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अतुलित रूप सम्पदा तेरी, मादकता मधु का निर्झर । नयनों में अप्रतिमाकर्षण, चेहरे का सौन्दर्य प्रखर ।।१।। नयन तुम्हारे कान्ति-सरोवर...
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29.11.15
क्यों
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सकल , नित , नूतन विधा में , दोष प्रस्तुत हो रहे क्यों । क्यों विचारों में उमड़ता , रोष जो एकत्र बरसों ।। १।। क्यों...
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