न दैन्यं न पलायनम्
26.4.15
आस कैसी
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सोचता हूँ सहज होकर, भावना से रहित होकर, अपेक्षित संसार से क्या ? हेतु किस मैं जी रहा हूँ ? भले ही समझाऊँ कितना, पर हृदय में प्रश्न उ...
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19.4.15
जीवन और मैं
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समय का भण्डार जीवन, कर्म का आगार जीवन, व्यक्तियों की विविधता में, बुद्धि का व्यापार जीवन । समय की निर्बाध तृष्णा, काटती रहती बराबर, ...
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12.4.15
उलझी लट सुलझा दो
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मन की उलझी लट सुलझा दो, मेरे प्यारे प्रेम सरोवर । लुप्त दृष्टि से पथ, दिखला दो, स्वप्नशील दर्शन झिंझोड़कर ।।१।। ढूढ़ा था, वह लुप्त हो...
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5.4.15
रात्रि विरहणा, दिन भरमाये
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जगता हूँ, मन खो जाता है, तुम्हे ढूढ़ने को जाता है । सोऊँ, नींद नहीं आ पाती, तेरे स्वप्नों में खो जाती । ध्यान कहीं भी लग न पाये, रात्...
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29.3.15
दुख-पतझड़
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जीवन पथ पर एक सुखद भोर, ले आई पवन मलयज, शीतल, अनुभव की स्मृति छोड़ गयी, एक भाव सहज, मधुमय, चंचल । निश्चय ही मन के भावों में, सावन के झों...
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22.3.15
आशान्वित मन
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आशाओं से संचारित मन, करने की कुछ चाह हृदय में । स्वप्नों से कुछ दूर अवस्थित, अब जीवन को पाया हमने ।।१।। स्थिर है मन संकल्पों में, लग...
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15.3.15
आये तुम
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स्वप्न देखने का जीवन में, साहस तो कर बैठे थे । आये तुम, पीछे पीछे, देखो स्वप्न और आ जायेंगे ।।१।। कठिन परिस्थियों में भी, एक किरण दिखी ...
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8.3.15
तुम ही
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जहाँ देखूँ, दीखता आकार तेरा, स्वप्न चुप है, कल्पनायें अनमनी हैं ।।१।। पा रहा हूँ प्रेम, साराबोर होकर, आज पुलकित रोम, मन में सनसनी है ।...
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1.3.15
जीवन-सार
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नहीं पुष्प में पला, नहीं झरनों की झर झर ज्ञात मुझे, नहीं कभी भी भाग्य रहा जो सुख सुविधायें आकर दे । इच्छायें थी सीमित, सिमटी, मन-दीवारों...
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22.2.15
आज प्रियतम जीवनी में आ रहा है
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अकेला उन्मुक्त उड़ना चाहता था, मेघ सा विस्तृत उमड़ना चाहता था, स्वतः प्रेरित, दूसरों के अनुभवों को, स्वयं के अनुरूप गढ़ना चाहता था । क...
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15.2.15
मन और जीवन
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मैं जीवन बाँधता हूँ और मन से रोज लड़ता हूँ , लुढ़कता ध्येय से मैं दूर, लेकिन फिर भी चढ़ता हूँ । बहुत कारक, विरोधों क...
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8.2.15
शिल्पी बन आयी
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मेरे मन-भावों की मिट्टी, राह पड़ी, जाती थी कुचली । तेज हवायें, उड़ती, फिरती, रहे उपेक्षित, दिन भर तपती । ऊँचे भवनों बीच एकाकी, शान्त,...
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1.2.15
ढाई आखर
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ढाई आखर, सबके लिये ही, अपने अलग अर्थ लिये। सबके लिये जीवन के एक पड़ाव पर, एक अनिवार्य अनुभव, एक स्पष्ट अनुभव। संभवतः उस समय तो नहीं, जिस स...
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25.1.15
स्वपीड़न
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कोई कष्ट देता, सहजता से सहते, पीड़ा तो होती, पर आँसू न बहते । कर्कश स्वरों में भी, सुनते थे सरगम, मन की उमंगों में चलते रहे हम । कभी...
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19.1.15
एक बचपन माँगता हूँ
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अब समय की राह में, अस्तित्व अपना जानता हूँ । यदि कहीं, कुछ भा रहा है, एक बचपन माँगता हूँ । कहाँ से लाऊँ सहजता, हर तरफ तो आवरण है । ...
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11.1.15
कुछ पल अपने
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दिन तो बीता आपाधापी, यथारूप हर चिंता व्यापी, कार्य कुपोषित, व्यस्त अवस्था, अधिकारों से त्रस्त व्यवस्था, होड़, दौड़ का ओढ़ चढ़ाये, अवस...
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4.1.15
दृश्य-गंगा
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रेतगंगा, श्वेतगंगा, वेगहत, अवशेष गंगा। रिक्त गंगा, तिक्त गंगा, उपेक्षायण, क्षिप्त गंगा। भिन्न गंगा, छिन्न गंगा, अनुत्साहित, खिन्न ग...
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27.12.14
पृथु जीवन के प्रथम वर्ष पर
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पृथु, जीवन के प्रथम वर्ष पर, नहीं समझ में आता, क्या दूँ ? नहीं रुके, घुटनों के राही, घर के चारों कोनो में ही, तुमने ढूँढ़ लिये जग अपन...
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24.12.14
याद आती हो
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मेरे दिन-रात चाहें, बस तुम्हारी याद में रहना, सुबह बन गुनगुनाती, रात बनकर गीत गाती हो ।।१।। नहीं अब है सताती, जीवनी ही स्वप्न में डूबी,...
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20.12.14
आँख-मिचौनी
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फिर आँखों को यूँ फिरा लिया, क्यों आँख-मिचौनी करती हो । क्यों गहरी अपनी आँखों में, कुछ बात छिपाये रहती हो ।। भाव पुरातन, शब्द नये हैं, क...
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